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सीतापुर के लहरपुर में अनोखी रामलीला, 50 साल से तालाब में हो रहा है रामलीला का मंचन

Published: Sat, 17 Oct 2026 05:23 PM (IST)

सीतापुर के लहरपुर में पिछले 50 वर्षों से तालाब के बीच अनोखे मंच पर रामलीला का मंचन किया जा रहा है।

तालाब के बीच अनोखे मंच पर रामलीला का मंचन

तालाब के बीच अनोखे मंच पर रामलीला का मंचन

HighLights

  1. लहरपुर में 50 वर्षों से तालाब में रामलीला मंचन।

  2. बाढ़ से निपटने और एकजुटता का संदेश देती रामलीला।

  3. पानी के बीच मंच पर कलाकारों का अद्भुत प्रदर्शन।

जागरण संवाददाता,सीतापुर। आस्था, परंपरा और सामाजिक सरोकारों का अनूठा संगम देखना हो तो लहरपुर की रामलीला को जरूर देखें। यहां रामलीला का मंचन केवल भगवान श्रीराम की लीलाओं के प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से बाढ़ की विभीषिका से निपटने और विपरीत परिस्थितियों में एकजुट होकर मुकाबला करने का संदेश भी दिया जाता है।

करीब 5 दशक से चली आ रही इस परंपरा में तालाब के भीतर मंच तैयार किया जाता है, जहां भगवान राम का अवतरण और अन्य लीलाओं का मंचन होता है। लहरपुर क्षेत्र बाढ़ की समस्या से प्रभावित रहा है। ऐसे में यहां आयोजित होने वाली रामलीला धार्मिक आस्था के साथ लोगों को कठिन परिस्थितियों से जूझने की प्रेरणा भी देती है।

तालाब में मंच तैयार कर रामलीला का आयोजन करना अपने में अनोखा है। पानी के बीच सजे मंच पर कलाकारों की ओर से लीलाओं का प्रदर्शन दर्शकों को आकर्षित करता है। इस आयोजन के जरिए यह संदेश देने का प्रयास किया जाता है कि बाढ़ चुनौतियों के सामने घबराने के बजाय सूझबूझ, सहयोग और सामूहिक प्रयासों से उनका सामना किया जा सकता है।

हर वर्ष अनूठे आयोजन से धार्मिक प्रसंग

आयोजक मंडल के प्रमोद टंडन, उमेश मेहरोत्रा, रामानंद अवस्थी व बलराम लोधी ने बताया कि तालाब में रामलीला का मंच तैयार करने की परंपरा करीब 50 वर्षों से चली आ रही है। हर साल इस अनूठे आयोजन के माध्यम से धार्मिक प्रसंगों को जीवंत किया जाता है।

कोई भी कठिनाई इतनी बड़ी नहीं होती, जिसका संगठित होकर सामना न किया जा सके। बाढ़ के दौरान प्रभावित परिवारों की मदद, आपसी सहयोग और संकट के समय एक-दूसरे का साथ देना जरूरी होता है। लहरपुर की रामलीला इसी भावना को धार्मिक परंपरा के माध्यम से लोगों तक पहुंचाती है।