सीतापुर में यूट्यूब पर फांसी लगाने का तरीका देख छात्र ने दी जान, मोबाइल की लत बनी काल
सीतापुर में 10वीं के छात्र ऋषभ ने यूट्यूब पर फांसी लगाने का तरीका देखकर आत्महत्या कर ली। मोबाइल की लत ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।
HighLights
सीतापुर में 10वीं के छात्र ने की आत्महत्या।
यूट्यूब पर फांसी लगाने का तरीका देखकर दी जान।
मोबाइल की लत और ऑनलाइन सामग्री बनी मौत का कारण।
जागरण संवाददाता, सीतापुर। हाथ में मोबाइल था और आंखों के सामने इंटरनेट की आभासी दुनिया। कक्षा 10 का छात्र ऋषभ इस तिलिस्मी दुनिया में ऐसा खोया कि उसे जिंदगी और मौत के बीच का फर्क महज एक ‘टास्क’ के पीछे की दौड़ जितना महीन लगने लगा। परिवार में कोई कलह थी, न पढ़ाई का दबाव।
स्वजन के मुताबिक, ऑनलाइन वीडियो से पैदा एक खतरनाक भ्रम ने उसके मन में ऐसा विश्वास पैदा किया कि वह मौत को मात दे सकता है, इसी दुस्साहस ने आखिर उसकी जिंदगी छीन ली। ऋषभ अपने ननिहाल उरदौली में रहकर पढ़ाई कर रहा था, जहां रविवार शाम को उसके नाना तौलाराम और नानी पशुओं को चारा देने घर से बाहर गई थीं।
कुछ देर बाद वह घर पहुंचे तो ऋषभ कमरे में फांसी के फंदे से लटका हुआ था। सामने उसका मोबाइल था जिसे चेक किया गया तो सामने आया कि ऋषभ ने कई बार यूट्यूब से फांसी लगाए जाने के तरीके की जानकारी की थी। ऋषभ के मामा पीलवान वर्मा ने बताया कि सोमवार शाम घटना से कुछ देर पहले उसने दरवाजे पर एक दोस्त से बातचीत की और कमरे में चला गया था।
कमरे में जाने के बाद उसने मोबाइल पर इंटरनेट सामग्री देखी। यह देखकर उसके मन में खतरनाक प्रयोग करने का विचार आया, जिसमें उसकी जान चली गई। घरवालों ने बताया कि ऋषभ किसी की बात नहीं सुनता था। ज्यादातर समय मोबाइल पर गुजारता था। ऑनलाइन गेमिंग और यूट्यूब की सामग्री में घंटों डूबा रहता था।
स्वजन ने मोबाइल का कम इस्तेमाल करने के लिए कई बार समझाया। गेम हटाने और मोबाइल की गतिविधियों को सीमित करने की कोशिश भी की, लेकिन आदत में बदलाव नहीं आया। वह स्वजन की सलाह से ज्यादा मोबाइल पर मिलने वाली जानकारी को महत्व देने लगा था। इंटरनेट पर दिखने वाली हर चीज को वह अपने तरीके से आजमाने का जुनून पाल लेता था।
दो साल पहले भी जुनून में घर से निकल गया था
पीलवान के मुताबिक, ऋषभ में कुछ अलग करने और जोखिम उठाने का जुनून पहले से था। करीब दो वर्ष पहले वह अपने दो-तीन दोस्तों के साथ साइकिल लेकर ‘खोज’ पर निकल पड़ा था। रास्ते में दोस्त घबरा गए और वापस लौट आए, लेकिन ऋषभ आगे बढ़ता रहा। रास्ता भटकने के बाद वह सीतापुर की ओर चला गया। देर रात उसे गंगा चतुर्भुज इंटर कालेज के पास से बरामद किया गया था।
एक मौत ने छोड़ दिए कई सवाल
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि बच्चों तक इंटरनेट की ऐसी सामग्री कितनी आसानी से पहुंच रही है, जो उनके लिए बेहद खतरनाक हो सकती है। मनोरोग चिकित्सक डॉ. प्रांशू अग्रवाल ने बताया कि बिना निगरानी के इंटरनेट की दुनिया बच्चों की सोच और व्यवहार को प्रभावित भी कर सकती है।
अभिभावकों यह जरूर देखना चाहिए कि उनके पाल्य स्क्रीन पर क्या देख रहे हैं। ऋषभ के मोबाइल में लोमहर्षक कंटेंट खोजने के लिंक मिले हैं। पबजी गेम का भी इनपुट हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में फांसी की पुष्टि हुई हैं।-जेबी पांडेय, कोतवाल, महोली।
