विधान सभा निर्वाचन-2022 में आयोग से प्रतिबंधित वस्तुओं की सप्लाई रोकने व आदर्श चुनाव आचार संहिता के अनुपालन को टीमें मुस्तैद हैं। ये टीमें अपने आवंटित क्षेत्र में दौरा कर रही हैं। रविवार को कुछ टीमों से फोन पर बात की गई। सभी ने सफर के मुताबिक ईधन कम मिलने और किसी ने पुलिस फोर्स पर्याप्त न मिलने की बात कही। जांच में नहीं मिली संदिग्ध वस्तु

रविवार दोपहर के एक बज रहे थे। महोली विधान सभा क्षेत्र की उड़न दस्ता टीम लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर थी। महोली की तरफ से आ रही एक कार को उड़न दस्ता टीम प्रभारी ने रुकने का इशारा किया। कार की डिग्गी खोली। खिड़की खोलकर सीटें भी जांचीं लेकिन, कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। चड़रा के पास हाईवे पर जांच के बाद उड़न दस्ता टीम के प्रभारी उप क्षेत्रीय वन अधिकारी महमूद आलम ने बताया, अभी कहीं से कोई संदिग्ध वस्तु बरामद नहीं हुई है। काटरगंज, रिछाही, बड़गांव, पिसावां क्षेत्र में भी उनकी उड़न दस्ता टीम ने दौरा किया है। उड़न दस्ता टीम प्रभारी के साथ दारोगा, दीवान और तीन कांस्टेबल हैं। फोर्स कम है, डीजल भी पर्याप्त नहीं सीतापुर विधान सभा क्षेत्र में दिन की दूसरी शिफ्ट के लिए गठित उड़न दस्ता टीम के प्रभारी सियाराम को शाम के 4.25 बजे फोन किया गया। उन्होंने अपनी लोकेशन कैप्टन मनोज पांडेय चौक बताई। कहा, उनके पास फोर्स कम है। पांच की जगह एक दारोगा व दो कांस्टेबल हैं। बताया, निर्वाचन आयोग से प्रतिबंधित वस्तुओं की निगरानी को वह हाईवे पर अधिक सक्रिय रहते हैं। प्रतिदिन उनकी गाड़ी 100 से 107-108 किमी का सफर करती है। दिक्कत बताई कि उन्हें 10 लीटर डीजल ही मिल रहा है। हर रोज सीतापुर से सकरन की दौड़, फिर क्षेत्र की निगरानी

लहरपुर विधान सभा क्षेत्र में दिन की दूसरी शिफ्ट के लिए गठित उड़न दस्ता टीम के प्रभारी श्रीराम ने 4.35 बजे अपनी लोकेशन बिसवां मार्ग पर सूर्यकुंड मंदिर के पास बताई। बताया, उनकी गाड़ी प्रतिदिन 160 से 170 किमी चलती है लेकिन, डीजल किसी दिन 15 तो किसी दिन 18 लीटर मिलता है। वैसे जरूरत हर रोज 20 लीटर डीजल की है। डीजल लेने जिला मुख्यालय जाना रहता है। टीम प्रभारी ने बताया, बाल विकास पुष्टाहार विभाग की गाड़ी है तो ड्राइवर हर रोज जिला मुख्यालय पर खड़ी करता है। हर रोज सकरन व लहरपुर थाने से फोर्स लेनी होती है।

वर्जन-

निर्वाचन में लगे वाहनों को ईधन देने के संबंध में कोई लिमिट तय नहीं है, जो जितना सफर करता है उस हिसाब में उसे ईधन दिया जाता है या फिर जितनी मांग करे। कुल मिलाकर निर्वाचन कार्य ईधन के अभाव में प्रभावित न हो, यह मकसद है। - संजय प्रसाद, जिला पूर्ति अधिकारी

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