सीतापुर : शहर के लालबाग में 123 साल पुराने तीन आलीशान द्वार हैं, जो सिस्टम की अनदेखी और अतिक्रमण का शिकार हैं। शहरवासियों का कहना है कि इन्हें पुरातत्व विभाग को सौंपा जा सकता है। इनकी आभा बता रही है कि आज से 100 साल पहले इनकी कितनी शान रही होगी, जो अनदेखी में अपना अस्तित्व खोने की स्थिति में हैं। ये तीनों ऐतिहासिक द्वार हमारे शहर के इतिहास के जीते-जागते उदाहरण हैं, जिन्हें अगली पीढ़ी के लिए सहजने की जरूरत है।

इनकी सुनिए..

लालबाग चौराहे से आलमनगर मार्ग पर पहले गेट के नीचे अतिक्रमण है, इसमें एक अतिक्रमणकर्ता गर्व से कहते हैं कि ये गेट हमारे शहर की शान नहीं, अभिमान हैं। कहा, तत्कालीन एसडीएम ने इन गेटों को सफेद पेंट करवाया था तो उन्होंने विरोध कर इसे चेरी कलर से पोतवाया था। अतिक्रमण क्यों किए हैं की बात पर कहते हैं कि हमारे पूर्वजों ने इन गेटों में पिलर आदि के लिए जमीन दी थीं तो नजूल की तरफ उन्हें टीनशेड लगाने की छूट दी गई है।

याचिका पर सुनवाई लंबित

अधिवक्ता रजनीकांत द्विवेदी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। न्यायालय ने 2 दिसंबर 2016 को आदेश पारित कर पुरातत्व विभाग और ईओ को एतिहासिक द्वारों के बचाव में आदेश पारित थे। प्रतिपक्षियों की उदासीनता पर याची ने अवमानना याचिका दाखिल की थी। जिसे मंजूर करते हुए कोर्ट ने 8 नवंबर 2017 को पुरातत्व विभाग और पालिका ईओ अवमानना नोटिस जारी किया था। तत्कालीन प्रभारी ईओ एसडीएम सदर प्रभाकांत अवस्थी के स्थानांतरण के बाद याची ने न्यायायलय में पुनस्र्थापन प्रार्थना पत्र नहीं दिया, जिससे अवमानना याचिका पर सुनवाई अब तक लंबित है।

37 को नोटिस, कार्रवाई शून्य

हाईकोर्ट लखनऊ में पीआइएल की सुनवाई में लालबाग के तीनों द्वारों को पुरातत्व विभाग के अधीन करने और अतिक्रमण हटाने का आदेश पारित किया था। इसके बाद अवमानना याचिका की मंजूरी और कोर्ट के कड़े रुख पर हरकत में आए प्रशासन ने जनवरी 2018 में एक साथ 37 अतिक्रमणकारियों को स्वयं अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी किया था। फिर अब तक कार्रवाई शून्य है।

12 दिसंबर 2017 को पालिकाध्यक्ष पद की शपथ लेने के बाद पहला काम हमने शहर में स्थापित सभी प्रतिमाओं व लालबाग के तीनों द्वार की रंगाई-पुताई कराने कार्य कराया था। अब ये मामला कोर्ट में है।

- राधेश्याम जायसवाल, पालिकाध्यक्ष-शहरी निकाय

Posted By: Jagran

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