सीतापुर : कमीशन के खेल में स्वास्थ्य कर्मी प्राइवेट पैथोलॉजी से जांच करा रहे हैं और विभाग के मुखिया को कुछ पता ही नहीं हैं। एक ऐसा ही मामला जिला अस्पताल में सामने आया है। इमलिया सुल्तानपुर इलाके के गांव हथिया निवासी सर्वेश शुक्ला ने बताया कि उनकी बेटी पूजा शुक्ला (10), बेटा आलोक शुक्ला (8) के गर्दन में बड़ी गिल्टियां निकली थीं। कुछ लोगों ने बताया कि टीबी के लक्षण हो सकते है। ये सुनकर वे बच्चों को लेकर जिला अस्पताल के टीबी विभाग पहुंचे। यहां स्वास्थ्य कर्मियों ने बच्चों को देखने के बाद उनकी जांच बाहर से प्राइवेट निदान पैथोलॉजी के लिए लिख दिया। सर्वेश ने आर्थिक तंगी का हवाला देकर बाहर से जांच न कराने की गुजारिश की, इस पर स्टॉफ ने कहा कि 15 दिन पहले आए होते तो बात बन जाती। बच्चों की एफएनए की जांच होनी है, जो बाहर से ही करानी पड़ेगी। मजबूरी में सर्वेश ने बाहर जाकर 12 सौ रुपये खर्च कर बच्चों की जांच कराई।

पीड़ित पिता के अनुसार स्वास्थ्य कर्मी ही सरकारी पर्चे पर बाहर से जांच कराएंगे तो सरकार की सुविधाओं का गरीबों को लाभ कैसे मिलेगा? कहीं बाहर से जांच कराने में कमीशन का खेल तो नहीं?

जिला क्षय रोग अधिकारी मुसाफिर यादव से इस बारे में बात की गई तो वे कुछ देर तक इधर-उधर की बातें कर गोलमोल जवाब देते रहे। बाद में बोले कि, ऐसा कैसे हो सकता है। इसकी जांच होगी। मामला बेहद गंभीर है। स्वास्थ्य कर्मी बाहर से जांच नहीं लिख सकता। इस मामले को लेकर डीटीओ से बात करुंगा। बाहर से जांच लिखने पर कार्रवाई होगी।

डॉ. आरके नैयर, सीएमओ

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