यूपी से दिल्ली तक फैला दिव्यांग प्रमाणपत्र का जाल, 16 प्रमाणपत्रों ने खोली नेटवर्क की पोल
दिल्ली पुलिस ने दिव्यांग प्रमाणपत्रों के एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा किया है, जिसमें बिना जांच के प्रमाणपत्र बनाए गए ...और पढ़ें
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यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।
HighLights
बिना जांच के फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्रों का बड़ा खुलासा।
दिल्ली पुलिस ने यूपी से दिल्ली तक रैकेट का पर्दाफाश किया।
सिद्धार्थ नगर में वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक की गिरफ्तारी हुई।
प्रशांत सिंह, सिद्धार्थ नगर। बिना किसी जांच के न केवल दिव्यांग प्रमाणपत्र बने, उस पर सीएमओ के डिजिटल हस्ताक्षर हो गए। दिल्ली के शैक्षणिक संस्थानों और नौकरी में दिव्यांग कोटे का लाभ लेने के लिए चल रहे फर्जीवाड़े की यह जानकारी सिद्धार्थ नगर और देवरिया पहुंची दिल्ली पुलिस की जांच में सामने आई।
सिद्धार्थ नगर से जारी चार प्रमाणपत्रों की जांच के दौरान वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक जयप्रकाश शुक्ला की गिरफ्तारी हुई तो देवरिया के पांच प्रमाणपत्र भी जांच के घेरे में आ गए। पता चला कि बरेली के आठ और बदायूं के चार प्रमाणपत्र भी फर्जी मिल चुके हैं। दिल्ली पुलिस के हाथ लगे 16 प्रमाणपत्रों में सभी यूपी के पते पर बने हैं, जबकि सभी के आधार पर दिल्ली का पता दर्ज है।
जांच अब इस ओर आगे बढ़ रही है कि सरकारी मेडिकल बोर्ड और ऑनलाइन व्यवस्था को साधकर यह नेटवर्क कितने प्रमाणपत्र बनवा चुका है। दिल्ली के मौरिस नगर थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमे की जांच में जुटी दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच टीम दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए लगाए गए सिद्धार्थ नगर से जारी चार दिव्यांग प्रमाणपत्रों की जांच के लिए यहां पहुंची।
इनमें एक प्रमाणपत्र जून और तीन जुलाई में जारी किए गए थे। प्रमाणपत्रों में गड़बड़ी मिलने के बाद टीम ने वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक जय प्रकाश शुक्ला को गिरफ्तार कर लिया गया। तत्कालीन सीएमओ और दिव्यांगता की जांच करने वाले मेडिकल बोर्ड के चिकित्सकों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। जांच में सामने आया कि सिद्धार्थनगर के दिव्यांग प्रमाणपत्र बोर्ड में मूल लिपिक के रूप में उपेंद्र गौड़ तैनात हैं।
इसके बावजूद वरिष्ठ मलेरिया निरीक्षक जयप्रकाश शुक्ला को बोर्ड से संबद्ध किया गया था। बोर्ड का यूजर आइडी और पासवर्ड उनके पास था। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड होने के बाद सीएमओ के मोबाइल पर ओटीपी जाता है और फिर यूनिक डिसेबिलिटी आइडी (यूडीआइडी) जारी होती है।
पुलिस यह देख रही है कि यूजर आईडी से किसने लागिन किया, किन आवेदनों पर काम हुआ और प्रमाणपत्र किस स्तर से जारी हुए। देवरिया की जांच में भी पांच लोगों के प्रमाणपत्रों में 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता दर्ज मिली। कुछ मामलों में दिव्यांग बोर्ड की प्रक्रिया की बजाय सीधे प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए हैं।
देवरिया-सिद्धार्थनगर से बरेली तक एक जैसा पैटर्न
दिल्ली पुलिस ने 31 अगस्त को अलीगढ़ निवासी और वर्तमान में फरीदाबाद के जाजरू में रहने वाले ललित कुमार उर्फ आदित्य को गिरफ्तार किया था। उसके पास 16 दिव्यांग प्रमाणपत्र मिले। सभी सुनने और देखने की दिव्यांगता के बनाए गए थे। उसके पास मेरठ के छात्र के नाम से बना प्रमाणपत्र और नीट-यूजी में एमबीबीएस, बीडीएस आदि की काउंसलिंग से जुड़े दस्तावेज मिले।
