सिद्धार्थनगर : उद्यान व खाद्य प्रसंस्करण विभाग ने लगभग बीस वर्ष पहले कस्बे में राजकीय पौधशाला इस उद्देश्य से प्रारंभ की थी कि क्षेत्र के किसानों को फलदार वृक्ष के पौधों के लिए भटकना न पड़े। कम रेट पर उन्हें उम्दा नस्ल के पौधे मिलेंगे और फूल के पौधों के शौकीन भी अपने घर आंगन को महका सकेंगे। लेकिन सारी उम्मीदें यहां धराशाई हैं, क्योंकि राजकीय पौधशाला सिर्फ एक माली के भरोसे चल रही है। यहां तैनात साहब के पास मुख्यालय की भी जिम्मेदारी है इसलिए वह यदाकदा ही इस पौधशाला पर आते है।

डुमरियागंज मुख्यालय कस्बे में राजकीय पौधशाला का हाल बदहाल है। यहां के पौधे देखरेख व कटिग आदि न होने के चलते सड़ रहे हैं अथवा झाड़ियों में तब्दील हो चुके हैं। पांच वर्ष पहले पाली हाउस का प्लांट तो लगा, लेकिन देखरेख न होने के चलते पूरी तरह से ध्वस्त हो गया। उपर लगने वाली शीट लापता हो चुकी है। जालियां जंग खाती जा रही हैं। पौधशाला में जलनिकासी की व्यवस्था न होने के चलते जलभराव हो जाता है। अधिकतर पौधे सड़ चुके हैं तो कुछ रोग लगने के चलते सूखते जा रहे हैं। किसानों की सहूलियत के लिए बनी पौधशाला मौजूदा समय में बेमतलब साबित हो रही है। पौधशाला की देखरेख के लिए तैनात माली बसंत बिहारी दो वर्ष पहले बस्ती से स्थानांतरित हो कर आए, लेकिन हालात से हार मान बैठे। उनका कहना है कि जब कोई सुविधा ही नहीं तो क्या बदलाव करेंगे। रामपाल व फेरई दैनिक वेतन भोगी हैं। उनसे काम तो महीने भर लिया जाता है, लेकिन मानदेय सिर्फ 25 दिन का मिलता है।

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पौधशाला में पौधों की किल्लत

मौजूदा समय में पौधशाला में आम, लीची, नींबू,कटहल,अमरूद के पौधे सीमित संख्या में हैं। बीजू प्रजाति के पौधों का रेट 10 रुपया तो अन्य 39 रुपया की दर से बिकते हैं। फूलों की प्रजाति में सिर्फ चांदनी,गुड़हल व रातरानी के पौधे हैं। पौधों की बेहतर नस्ल यहां नहीं है। जिसके चलते लोगों को दर दर भटकना पड़ता है।

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बोले जिम्मेदार

उद्यान इंस्पेक्टर संदीप वर्मा ने बताया कि पौधशाला के उच्चीकरण व जलनिकासी की व्यवस्था के लिए कार्ययोजना बनी है। स्वीकृति मिलने पर कार्य कराया जाएगा। पौधरोपण अभियान के तहत छह हजार पौधे विभिन्न ग्राम पंचायतों को दिए गए अभी तक भुगतान नहीं प्राप्त हुआ है।

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