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सिद्धार्थनगर में मासूम से दरिंदगी के दोषी को 20 साल की जेल, पॉक्सो कोर्ट ने 36 दिन के भीतर सुनाया फैसला

Published: Thu, 29 Oct 2026 06:38 PM (IST)Updated: Thu, 29 Oct 2026 06:41 PM (IST)

सिद्धार्थनगर में पॉक्सो कोर्ट ने बच्ची से दुष्कर्म के दोषी चचेरे चाचा को 36 दिनों में फैसला सुनाते हुए 20 ...और पढ़ें

एआई जनरेटेड तस्वीर।

एआई जनरेटेड तस्वीर।

HighLights

  1. पॉक्सो कोर्ट ने 36 दिन में सुनाया दुष्कर्म का फैसला।

  2. दोषी चचेरे चाचा को 20 वर्ष कारावास, 50 हजार जुर्माना।

  3. चिकित्सीय साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर आधारित निर्णय।

जागरण संवाददाता, सिद्धार्थनगर। बच्ची से दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम वीरेंद्र कुमार की न्यायालय ने गुरुवार को महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया। त्वरित सुनवाई करते हुए न्यायालय ने 36 दिनों में मामले का निस्तारण कर दोषसिद्ध को 20 वर्ष के कारावास और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। दोषसिद्ध राजेश कुमार पीड़िता का चचेरा चाचा है। न्यायालय ने चिकित्सीय और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ 6 गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद निर्णय दिया।

विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो अधिनियम पवन कुमार पाठक ने न्यायालय को बताया कि घटना नौ जुलाई की दोपहर की है। बच्ची की मां ने पुलिस को दी तहरीर में आरोप लगाया था कि परिवार का ही एक सदस्य बच्ची को छत पर ले गया था। कुछ देर बाद बच्ची का भाई छत पर पहुंचा तो उसने आरोपी को बच्ची के साथ आपत्तिजनक कृत्य करते देखा। उसने पैर से मारकर आरोपी को हटाया। इसके बाद आरोपी मौके से भाग निकला। भाई बच्ची को लेकर नीचे आया, जहां उसने स्वजन को घटनाक्रम की जानकारी दी।

पुलिस ने बच्ची का चिकित्सीय परीक्षण कराने के बाद विवेचना पूरी कर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। न्यायालय ने 25 अगस्त को मामले का संज्ञान लिया और 23 सितंबर को आरोप के विरुद्ध आरोप निर्धारित किए। सुनवाई के दौरान विवेचक और चिकित्सक समेत छह गवाहों के बयान दर्ज किए गए।

न्यायालय ने बच्ची के बयान सहित उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण किया। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि दंड निर्धारित करते समय अपराध की प्रकृति, उसे अंजाम देने के तरीके और उससे जुड़ी परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक है, ताकि न्याय के उद्देश्य की पूर्ति हो सके। दोषसिद्ध पाए जाने पर आरोपी को कठोर कारावास और अर्थदंड से दंडित किया गया।