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सिद्धार्थनगर के जनता सेवा अस्पताल में सरकारी सील तोड़कर अवैध ऑपरेशन, छापेमारी में मिले सबूत

Published: Tue, 25 Aug 2026 08:56 PM (IST)

सिद्धार्थनगर के जनता सेवा अस्पताल में सरकारी सील तोड़कर दोबारा ऑपरेशन किए जाने का मामला सामने आया है। छापेमारी में ...और पढ़ें

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HighLights

  1. जनता सेवा अस्पताल में सरकारी सील तोड़कर अवैध ऑपरेशन का खुलासा।

  2. छापेमारी में ऑपरेशन के औजार और खून लगे सामान बरामद हुए।

  3. पुलिस ने राकेश यादव को हिरासत में लिया, आगे की कार्रवाई जारी।

जागरण संवाददाता, सिद्धार्थनगर। जनता सेवा अस्पताल में सरकारी सील तोड़कर दोबारा ऑपरेशन किए जाने का मामला सामने आया है। शिकायत पर सोमवार मध्य रात स्वास्थ्य विभाग की तीन सदस्यीय टीम ने अस्पताल में छापेमारी की।

जांच के दौरान एक सरकारी सील टूटी मिली, जबकि ऊपर सील किए गए कमरे की कुंडी भी टूटी थी। टीम को मौके से ऑपरेशन के औजार, खून के निशान वाली सामग्री और रूई मिली। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल भी तैनात रहा।

बताया गया कि ऑपरेशन कराए गए रोगियों को पहले ही किसी दूसरी जगह भेज दिया गया था। अस्पताल के बाहर मिली एक गर्भवती महिला को सीएचसी ले जाया गया, जहां से चिकित्सकों ने उसे मेडिकल कालेज सिद्धार्थनगर रेफर कर दिया।

इटवा स्थित जनता सेवा अस्पताल में 23 मई की रात ऑपरेशन के दौरान नवजात की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल की जांच शुरू की थी। जांच के दौरान अस्पताल का संचालन बंद करने का निर्देश दिया गया था।

इसके बावजूद 27 जून की रात अस्पताल में दो प्रसूताओं के ऑपरेशन किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद जिला और स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मजिस्ट्रेट के साथ अस्पताल में छापेमारी की थी। कार्रवाई के बाद अस्पताल में दो सरकारी सील लगाई गई थीं।

सोमवार रात सील तोड़कर फिर ऑपरेशन किए जाने की शिकायत मिलने पर जिले से नोडल अधिकारी डॉ. मानवेंद्र पाल, डिप्टी सीएमओ डॉ. आरजी सिंह और सीएचसी इटवा के अधीक्षक डॉ. संदीप द्विवेदी अस्पताल पहुंचे। टीम ने जांच की तो एक सील टूटी मिली। ऊपर सील किए गए कमरे की कुंडी भी टूटी थी।

मौके पर ऑपरेशन किए जाने के साक्ष्य मिले। एक कमरा अंदर से बंद था। टीम ने उसे खोलने का प्रयास किया, लेकिन कमरा नहीं खोला जा सका। अधिकारियों के अनुसार मौके पर मजिस्ट्रेट मौजूद नहीं थे, इसलिए कमरे का ताला तोड़ना संभव नहीं था।

बताया जा रहा है कि सील तोड़ने के आरोप में राकेश यादव को पुलिस अपने साथ ले गई, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। अस्पताल में पहले से मुकदमा दर्ज होने के कारण स्वास्थ्य विभाग अब मामले में आगे की कार्रवाई की तैयारी में है।

प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार मिश्रा ने बताया कि रात में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल में कार्रवाई की है। विभाग की ओर से लिखित तहरीर मिलने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

सील तोड़कर ऑपरेशन किए जाने की शिकायत पर छापेमारी की गई थी। मौके पर सरकारी सील टूटी मिली और ऑपरेशन किए जाने के साक्ष्य भी मिले हैं। अस्पताल के संबंध में पहले से मुकदमा पंजीकृत है। उसमें धाराएं बढ़ाने के साथ राकेश यादव का नाम शामिल करने की कार्रवाई की जाएगी। एक कमरा अंदर से बंद मिला था। मजिस्ट्रेट की मौजूदगी नहीं होने के कारण उसे तोड़ा नहीं जा सका। उन्होंने बताया कि अस्पताल का पंजीकरण समाप्त किया जा चुका है।

-डाॅ. मानवेंद्र पाल, नोडल अधिकारी

एलआईयू व पुलिस पर मारपीट का आरोप

डुगडुइया निवासी राजेश यादव ने थाने में तहरीर देकर एलआईयू और पुलिसकर्मियों पर अपने भाई राकेश यादव के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि राकेश बीमार मामी की दवा लेने जनता सेवा अस्पताल स्थित ऐसे मेडिकल स्टोर पर गए थे, जिस पर सील नहीं लगी थी।

इसी दौरान एलआईयू (स्थानीय अभिसूचना इकाई) के आकाश चौरसिया, कंप्यूटर आपरेटर विपुल राय और कांस्टेबल नरेंद्र देव चौहान वहां पहुंचे और राकेश पर दबाव बनाने लगे। विरोध करने पर गाली-गलौज और मारपीट का आरोप लगाया गया है।

राजेश के अनुसार, पुलिसकर्मी राकेश को अपने साथ ले गए। उन्होंने बताया कि राकेश की गाड़ी में दो लाख रुपये नकद रखे थे। उन्होंने निष्पक्ष जांच, भाई को छोड़ने और नकदी सहित वाहन सिपुर्द करने की मांग की है। प्रभारी निरीक्षक इटवा ने बताया कि नोडल अधिकारी के आने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।