सिद्धार्थनगर में SP की कुर्सी पर बैठी सुनैना की आंखों में सजा अफसर बनने का सपना, बोली- हमें भी बनना है IAS-PCS
सिद्धार्थनगर में मिशन शक्ति के तहत छात्राओं ने एक दिन के लिए पुलिस अधीक्षक, सीडीओ, बीएसए और सीएमओ की भूमिका ...और पढ़ें

एक दिन की एसपी बनी सुनैना।-.जागरण
HighLights
सुनैना ने संभाली पुलिस अधीक्षक की कुर्सी, सुनी शिकायतें।
सरोजा बनीं सीडीओ, बैंक संबंधी समस्या का किया निस्तारण।
सौम्या ने परखी शिक्षा विभाग, पूर्णिमा बनीं मुख्य चिकित्साधिकारी।
जागरण संवाददाता, सिद्धार्थनगर। पुलिस कार्यालय में मंगलवार को जब कक्षा आठ की छात्रा सुनैना पुलिस अधीक्षक की कुर्सी पर बैठीं तो उनके चेहरे पर खुशी और आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। सामने फरियादी अपनी समस्याएं लेकर खड़े थे। कभी पुलिस अधिकारियों को दूर से देखने वाली सुनैना आज उनकी भूमिका में थीं।
लोगों की पीड़ा सुनना, उनकी शिकायतों को समझना और संबंधित थाना प्रभारियों को कार्रवाई के निर्देश देना उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा था। एक दिन के लिए मिली इस जिम्मेदारी ने उनके मन में भविष्य में पुलिस अधिकारी बनने की उम्मीदों को और मजबूत कर दिया।
सुनैना ने मिशन शक्ति के तहत जिले की पुलिस कप्तान की भूमिका निभाई। उन्होंने जनसुनवाई में आए लोगों की समस्याएं गंभीरता से सुनीं और संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। मामलों की निष्पक्ष जांच और शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
वर्दीधारी अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच बैठकर काम करने का अनुभव उनके लिए बिल्कुल नया था। पुलिस अधीक्षक की कुर्सी पर बैठकर उन्हें महसूस हुआ कि इस पद के साथ कितनी बड़ी जिम्मेदारी जुड़ी होती है। फरियादियों की उम्मीदें और उनकी समस्याओं का समाधान करना कितना महत्वपूर्ण है, इसे उन्होंने करीब से समझा।
सुनैना के पिता विजय ने बताया कि तस्वीर में अपनी बिटिया को पुलिस अधीक्षक की कुर्सी पर बैठे देखकर वह बेहद खुश हुए। उनके लिए यह केवल एक तस्वीर नहीं, बल्कि बेटी के भविष्य के सपने की झलक थी।
उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि सुनैना मन लगाकर पढ़ाई करे और एक दिन सचमुच पुलिस अधिकारी बनकर लोगों की सेवा करे। परिवार की यह खुशी सुनैना के लिए भी प्रेरणा बन गई। सुनैना ने कहा कि उसे आगे चलकर आइएएस-पीसीएस बनना है।

विकास भवन में जोगिया क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय धुसवा राजा की कक्षा सात की छात्रा सरोजा ने एक दिन के लिए मुख्य विकास अधिकारी की जिम्मेदारी संभाली। कार्यालय में पहुंचे एक फरियादी ने बैंक से संबंधित समस्या बताई तो सरोजा ने ध्यानपूर्वक उसकी बात सुनी। इसके बाद मौके पर मौजूद अग्रणी जिला प्रबंधक को शिकायत का तत्काल और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करने के निर्देश दिए।
सीडीओ की कुर्सी पर बैठकर सरकारी कामकाज समझने का अवसर सरोजा के लिए यादगार रहा। फरियादी की समस्या सुनते समय उन्हें एहसास हुआ कि अधिकारी की जिम्मेदारी केवल कुर्सी पर बैठने तक सीमित नहीं होती, बल्कि लोगों की परेशानियों को समझकर उनका समाधान कराना भी उसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस अनुभव ने उनके भीतर आगे बढ़ने और पढ़ाई के बल पर बड़ा पद हासिल करने की आकांक्षा को नया संबल दिया।
सरोजा की मां विंद्रावती अपनी बेटी को अधिकारी की कुर्सी पर बैठा देखकर भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि बिटिया को इस तरह देखकर बहुत खुशी हुई। उनकी इच्छा है कि बेटी का यह सपना केवल एक दिन के अनुभव तक सीमित न रहे, बल्कि वह पढ़ाई पूरी करके वास्तव में अधिकारी बने। मां की आंखों में बेटी के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद साफ दिखाई दी।

मिशन शक्ति के तहत जिले की दो अन्य मेधावी छात्राओं को भी महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभालने का अवसर मिला। पूर्व माध्यमिक विद्यालय मदनपुर की कक्षा आठ की छात्रा सौम्या वर्मा ने एक दिन के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की भूमिका निभाई। उन्होंने पटल सहायक अमित पांडेय से विभागीय कार्यों की प्रगति की जानकारी ली।

इसके बाद जिला समन्वयक सुरेंद्र श्रीवास्तव के साथ बैठक कर जिले में संचालित मिशन शक्ति कार्यक्रम की समीक्षा की। पूर्व माध्यमिक विद्यालय बूड़ा की कक्षा छह की छात्रा पूर्णिमा ने मुख्य चिकित्साधिकारी की कुर्सी संभाली। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के कामकाज की जानकारी ली और चिकित्सकों से चिकित्सा शिक्षा की प्रक्रिया के बारे में पूछा।
इस पहल का उद्देश्य बालिकाओं की प्रतिभा को निखारना और उन्हें प्रशासनिक व अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं के प्रति प्रोत्साहित करना है। अधिकारियों की कुर्सी पर बैठकर कामकाज समझने से छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ता है। मिशन शक्ति की यह पहल बेटियों को यह भरोसा दिलाने का प्रयास है कि मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर वे भविष्य में अपने सपनों को साकार कर सकती हैं।
