सिद्धार्थनगर : सरकार बूंद- बूंद पानी सहेजने के लिए प्रयासरत है और जागरूकता मुहिम भी चला रही है। इसके तहत तहसील प्रशासन पोखरों से अतिक्रमण हटाने और साफ-सफाई की व्यवस्था की रणनीति बना रहा है। बारिश का जल संचय करने में ताल पोखरों का महत्व किसी से छिपा नहीं है, लेकिन डुमरियागंज में इसकी अनदेखी हो रही थी। कस्बे के सबसे बड़े पोखरे पर अतिक्रमण था। जिसे कुछ माह पहले एसडीएम ने हटवाया और नपं को निर्देशित किया कि सफाई व सुंदरीकरण कार्य कराएं। एसडीएम के आदेश के बाद भी पोखरा पुरानी स्थिति में जीर्णोद्धार की बाट जोह रहा है। ऐसा ही हाल डुमरियागंज- बढ़नी मार्ग पर स्थित गोरख तलैया की भी है।

डुमरियागंज में चाहे नगर पंचायत के ताल- पोखरे हों अथवा ग्रामीण क्षेत्रों में बने आदर्श तालाब। सबकी स्थिति कमोबेश एक सी है। अधिकतर पोखरे गंदगी व जलीय पौधों से पटे पड़े हैं तो कुछ ऐसे भी हैं, जो गर्मी की आमद से पहले ही सूखे पड़े हैं। नपं के कोसी खुर्द बुजुर्ग में 84 बीघा रकबे में बड़ा तालाब है, जिसपर कुछ माह पहले आस पास के लोगों ने फर्जी इंद्राज के सहारे कब्जा जमा रखा था। मामला एसडीएम की अदालत तक गया तो उन्होंने न सिर्फ कब्जा खारिज किया, बल्कि अतिक्रमण भी हटवाया था। तालाब की साफ- सफाई और सुंदरीकरण कार्य के लिए नपं को निर्देशित किया। लेकिन उदासीनता इस कदर कि तीन माह बाद भी पोखरा पुराने हालात में गंदगी से पटा पड़ा हुआ है। इसी तरह खीरा मंडी और राप्ती पुल के बीच में सड़क के ठीक किनारे गोरख तलैया है। इसे आज तक कभी भी साफ करवाने की जहमत जिम्मेदारों ने नहीं उठाई। और तो और तमाम मोहल्लों का गंदा पानी भी इसी में गिराया जाता है। तलैया जलकुंभी, शैवाल आदि जलीय खर पतवारों से पटा पड़ा है। गंदगी के चलते पानी काला पड़ता जा रह है। परसा हुसेन, मेंहीहर दो, औराताल में लाखों के खर्च से बने आदर्श तालाब सूखे पड़े हैं। जल संचयन की कवायद यहां आधी अधूरी है और जिम्मेदार मौन साधे बैठे हैं। एसडीएम त्रिभुवन ने कहा कि नपं के तालाबों को शीघ्र ही साफ कराया जाएगा। बीडीओ सुशील कुमार अग्रहरि ने कहा कि ग्रामीण अंचल के ताल पोखरों को भी जल संचय के योग्य बनाया जाएगा।

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