सिद्धार्थनगर : ठंड बेसहारा पशुओं पर भारी पड़ रही है। अभी तक चारा-पानी के लिए पशु इधर-उधर भटक रहे थे, तो अब मार्ग दुर्घटना में अपनी जान गंवा रहे हैं। बेसहारा पशुओं को न रहने के लिए जगह मिल रही है और न ही भोजन-पानी की। जिम्मेदार आंख मूंदे बैठे हैं।

नगर मुख्यालय पर कोई गोशाला नहीं है। जिला पंचायत का गोआश्रय है, जो उपेक्षित है। ऐसे में बड़ी संख्या में बेसहारा पशु सड़कों पर घूमते हैं। इन्हें भूख लगती है तो इनका रूख खेतों की ओर चला जाता है। किसानों की गाढ़ी कमाई को नुकसान करके फिर इनका डेरा सड़क या इसकी पटरी पर होता है। इटवा चौराहा हो या फिर बढ़नी, डुमरियागंज, बिस्कोहर व बांसी मार्ग हर समय कहीं न कहीं पशुओं का झुंड दिखाई दे रहा है। चूंकि इधर कोहरे का प्रकोप ज्यादा है, इसलिए मार्ग दुर्घटनाओं में भी इनकी जान जा रहा है। छह जनवरी से अब तक तीन पशु हादसे में अपनी जान गंवा चुके हैं। चूंकि कस्बे में गोशाला नहीं है, इसलिए इनका कहीं ठिकाना नहीं है। ठंड में इनकी स्थिति बड़ी दयनीय है। राम ललित, नेवास, प्रमोद कुमार, खलील अहमद का कहना है कि नगर क्षेत्र की बात क्या कहें, मुख्यालय पर बड़ी संख्या बेसहारा पशु घूम रहे हैं। इनके लिए कोई व्यवस्था नहीं बन पा रही है। प्रभारी अधिशासी अधिकारी राजन गुप्ता ने कहा कि नगर पंचायत ने कार्य करना शुरू कर दिया है। शीघ्र ही पक्की गोशाला के लिए भूमि तलाश करके गोशाला निर्माण कराई जाएगी। फिर यहीं पर बेसहारा पशुओं को रखने की व्यवस्था बनाई जाएगी।

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