सिद्धार्थनगर : जीवमात्र के कल्याण का मार्ग, अहंकार को सर्वथा त्याग कर श्रीभगवान के शरणागत होना बतलाया गया है। जिसे भक्ति योग कहते हैं। मानव मात्र सच्चे मन व लगन से जो कार्य करेंगे उसमें सफलता अवश्य मिलेगी।

उक्त बातें मानस कोकिला विजय लक्ष्मी शुक्ला ने कहीं। वह श्री राम जानकी मंदिर समाधि स्थल महुलानी में चल रहे श्री राम महायज्ञ के समापन अवसर पर प्रवचन कर रहीं थीं । कहा कि जीव को अपने अनुभवों का उपयोग करना चाहिए। इस कलियुग में श्रीभगवान के नाम और यश को छोड़ कर दूसरे जितने भी साधन हैं उनमें से किसी से भी सिद्धि नहीं मिल सकती। इस कलयुग में जन्मे सभी मनुष्यों को चाहिए कि जीवों के उद्धारार्थ कार्य करें क्यों कि परोपकार ही सबसे बड़ा धर्म है। संतोष पांडेय, बालकृष्ण पांडेय, वीरेंद्र पांडेय, उप्पी पांडेय, राजेंद्र पांडेय, तुलसीराम, रामाज्ञा, तप्पा पाण्डेय, जुगुल किशोर मिश्र, दीना, बैजनाथ, उपेंद्र, सिटू पाण्डेय, सर्वजीत, शिवशंकर पाण्डेय, प्रदीप कुमार, लवकुश आदि उपस्थित रहे।

Posted By: Jagran

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