सिद्धार्थनगर : जिला निर्वाचन अधिकारी दीपक मीणा ने शुक्रवार को लोहिया कला भवन में सेक्टर व जोनल अधिकारियों के साथ बैठक की। वीडियो निगरानी टीम को सक्रिय रहने के लिए निर्देशित किया। निर्वाचन आयोग की ओर से जारी सी-विजिल एप के संबंध में विस्तृत जानकारी दी। स्वीप टीम को मतदाता जागरूकता अभियान में तेजी लाने के निर्देश दिए।

डीएम ने कहा कि वीडियो निगरानी के प्रभारी व टीम के सभी सदस्य सक्रिय हो जाएं। विधानसभा चुनाव को सकुशल संपन्न कराने का लक्ष्य निर्धारित करें। सी-विजिल एप पर कोई भी व्यक्ति आचार संहिता के उल्लंघन की शिकायत कर सकता है। सी-विजिल एप के माध्यम से यदि कोई शिकायत आती है तो उस पर त्वरित प्रभावी कार्रवाई करना सुनिश्चित किया जाएगा। निर्वाचन आयोग की ओर से अभी तक जो भी निर्देश प्राप्त हुए है और जो मिल रहे हैं, उसे पूरा पढ़ ले जिससे किसी प्रकार की समस्या नहीं उत्पन्न हो सके। निर्वाचन कार्य में सेक्टर आफिसर की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। पोस्टल बैलेट के लिए सभी विभागों के कर्मचारियों का डाटा तैयार कर लिया जाए। स्वीप टीम लोगों को मतदान के लिए जागरूक करने की तैयार कार्ययोजना पर अमल में लाए। सीडीओ पुलकित गर्ग, एडीएम उमाशंकर, पीडी डीआरडीए सुरेंद्र कुमार गुप्ता, डीडीओ शेषमणि सिंह, समाज कल्याण अधिकारी डा. राहुल गुप्ता, अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी तन्मय, दिव्यांग जनसशक्तीकरण अधिकारी एजाजुल हक, सूचना विज्ञान अधिकारी नसीम अहमद आदि मौजूद रहे।

पंचायतों पर भारी प्रधान प्रतिनिधियों की कारगुजारी

सिद्धार्थनगर : सशक्त ग्राम पंचायत सुदृढ़ लोकतंत्र का आधार है। आधी आबादी को ध्यान में रखकर ही पंचायतों को सशक्त करने के मकसद से महिलाओं को आरक्षण दिया गया। बावजूद इसके अधिकतर ग्राम पंचायत जिनका प्रतिनिधित्व महिलाएं कर रही हैं, लेकिन इनकी सहभागिता शून्य बनी हुई है और सारा कार्य पुरुष इनके प्रतिनिधि बनकर कर रहे हैं। यह नारी सशक्तिकरण और सशक्त लोकतंत्र की परिकल्पना पर किसी कुठाराघात से कम नहीं। भनवापुर विकास खंड में कुल 111 ग्राम पंचायतें हैं। जिनमें 57 महिलाएं लोकतंत्र की सबसे छोटी संसद का नेतृत्व कर रही हैं। 54 ग्राम पंचायतों जिनका प्रतिनिधित्व पुरुष कर रहे हैं। लेकिन जहां महिला प्रधान हैं वहां की जिम्मेदारी भी पुरुष ही प्रतिनिधि बन निभा रहे हैं। महिला ग्राम प्रधान अधिकतर उन्नयन प्रशिक्षण व बैठक में भी नहीं पहुंचती। यहां तक कि कुछ प्रतिनिधि कूट रचित हस्ताक्षर के सहारे ग्राम पंचायत के सभी कार्यों का निर्णय भी आसानी से कर रहे हैं। यह पंचायती राज अधिनियम के लिए किसी चुनौती से कम नहीं। ब्लाक की अधिकतर महिला प्रधान सिर्फ जीतने के बाद प्रमाणपत्र लेने के लिए पहुंची थीं। उसके बाद की बैठकों में इनकी जगह प्रतिनिधि ही बैठकों व प्रशिक्षणों में दिखते हैं।

पंचायत राज अधिकारी आदर्श ने कहा कि ग्राम प्रधान प्रतिनिधि की नियुक्ति पूर्णत: असंवैधानिक व निराधार है। किसी भी बैठक या प्रशिक्षण में ग्राम प्रधान के अतिरिक्त किसी अन्य को प्रतिभाग करने की अनुमति शासन नहीं देता। बीडीओ को इसका अनुपालन कराने के निर्देश दिए जाएंगे।

Edited By: Jagran