सिद्धार्थनगर : आजादी से पहले बने थानों के अब दिन बहुरेंगे। जिला पुलिस ने इसके लिए कार्ययोजना बनाई है। आजादी के समय के बनी इमारत, वृक्ष आदि को संरक्षित किया जाएगा। थानों से जुड़ी यादों को भी दीवारों पर उकेरा जाएगा। इन्हें आधुनिक बनाते हुए इनके मूल स्वरूप को बनाए रखा जाएगा। इसके लिए धन आवंटन भी शुरू कर दिया है। आजादी से पहले के बने थानों से प्रस्ताव मांग गया है। एक सप्ताह में इन्हें अपनी कार्ययोजना तैयार करनी है।

आजादी से पहले के थानों को संरक्षित किया जाएगा। इसके भवन को सुरक्षित रखने की योजना तैयार की गई है। आजादी के समय थानों से जुड़ी यादों को सहेजा जाएगा। इसे दीवारों पर लिखा जाएगा। इन थानों को प्राथमिकता के आधार पर आधुनिक भी बनाया जाएगा। उच्चीकृत करने के इन्हें आदर्श थानों का दर्जा भी दिया जाएगा। अंग्रेजी हुकूमत के समय यह बस्ती जिला था। उस समय अंग्रेजों ने सुरक्षा के दृष्टिकोण से नेपाल बार्डर पर तीन थाना स्थापित किए थे। यह थाना उसका बाजार, चिल्हिया व ढेबरुआ थे। डुमरियागंज में अंग्रेजों के साथ गुरिल्ला युद्ध हुआ था। उसे दबाने के लिए यहां पर पुलिस स्टेशन बनाया गया था। इसके अलावा मध्य भू-भाग पर पकड़ बनाए रखने के लिए बांसी में कोतवाली स्थापित किया। 1989 में सिद्धार्थनगर जनपद बनने के बाद यह सभी थाना यहां समाहित किए गए।

लखनऊ के विभूतिखंड माडल पर बनेंगे यह थाने

आजादी से पहले के थानों को लखनऊ के विभूतिखंड थाना के तर्ज पर तैयार किया जाएगा। इसमें रेन वाटर हार्वेस्टिग, जल आपूर्ति, जल निकासी, सीवेज की व्यवस्था अनिवार्य होगी। इसके अलावा फरियादियों की सुविधा के लिए आगंतुक कक्ष, वाशरूम, प्रशासनिक कक्ष, अलग-अलग विवेचना कक्ष, पूछताछ कक्ष, महिलाओं के लिए कक्ष व पिक शौचालय बनाया जाएगा। आवासीय भवन, डाइनिग कक्ष, कामन रूम व लाइब्रेरी भी होंगी। एएसपी सुरेश चंद्र रावत ने कहा कि लखनऊ का विभूतिखंड थाना सभी सुविधाओं से परिपूर्ण है। इसी तर्ज पर जनपद के थानों को विकसित किया जाएगा। थानों को चार श्रेणी में विभाजित किया गया है। ग्रुप डी में आजादी के पहले के थानों को रखा गया है। इन सभी से प्रस्ताव मांगा गया है। एक थाना में तीन करोड़ रुपये तक काम कराया जाएगा। इतने धन में कायाकल्प किया जाएगा।

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