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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 10, 2014 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कोल्ड डायरिया से मासूम की मौत, 23 बीमार

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Published: Fri, 10 Jan 2014 12:06 AM (IST)Updated: Sat, 11 Jan 2014 05:12 PM (IST)

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लेंगड़ीगूलर (श्रावस्ती): तराई में ठंड अब जानलेवा बन गई है। कोहरे और गलन भरी हवाओं के बीच कोल्ड डायरिया और बुखार का कहर जारी है। विकास क्षेत्र गिलौला के अहिराघासी (भिठौरा) में कोहरे और पाले के बीच सात दिनों से कोल्ड डायरिया व बुखार से लोग पीड़ित चल रहे हैं। कोल्ड डायरिया की चपेट में आकर गुरुवार को एक और मासूम की मौत हो गई। 23 लोग पीड़ित हैं। स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी इस जानलेवा संक्रामक बीमारी से अन्जान बने हैं।

विकास क्षेत्र गिलौला के डिकरा गांव के बाद अब अहिराघासी (भिठौरा) में कोल्ड डायरिया और बुखार कहर बरपा रहा है। कोल्ड डायरिया से पीड़ित लवकुश (9 माह) पुत्र विद्यल उपाध्याय की इलाज के दौरान गुरुवार को सुबह मौत हो गई जबकि इस बीमारी की चपेट में आकर दुर्गेश (2) पुत्र बल्लू, पूजा (4) पुत्री बल्लू, लल्लू(20) पुत्र ननके, कुशला देवी (45) पत्‍‌नी राजेश्वरी, कृष्णकुमारी (45) पत्‍‌नी पारस, संजू (35) पत्‍‌नी कृष्ण बहादुर, अखिलेश (22) पुत्र राजेश्वरी, सुनीता(25) पत्‍‌नी अनोखी, मनोरानी (20) पत्‍‌नी अखिलेश, रीतेश (18) पुत्र कृष्ण कुमार, सोनम(4) पुत्री नरेंद्र, रीना(25) पत्‍‌नी बल्लू, पुजारी (70), रामतेज(55) पुत्र भगौती, प्रीतम (1)पुत्र पवन, रामलोचन (35)पुत्र रामकरन, रेखा (4), गोगई (2) पुत्रीगण शिवकुमार, मझिला (75) पत्‍‌नी शोभाराम, बलदेव(70), मुकेश (12)पुत्र जगन्नाथ, सत्यदेव (7) तथा रामकिशोर (60) कोल्ड डायरिया व बुखार से पीड़ित चल रहे है। सात दिनों से इस गांव में डायरिया व बुखार की बीमारी फैली हुई है। ग्रामीण बताते हैं कि सूचना के बाद भी स्वास्थ्य महकमा अंजान बना हुआ है। यही नहीं ठिठुरन और बर्फीली हवाएं मरीजों की दुश्वारियों को और बढ़ा रही हैं। गांव में सफाई व्यवस्था का हाल भी बेहाल है। ओहदेदार बीमारियों से बेपरवाह हैं। इससे पूर्व ठठिया में कोल्ड डायरिया से तीन बच्चों की मौत हो चुकी है।

साहब का नहीं उठता फोन

सीएमओ डॉ. आरपी गुप्ता से इस संबंध में जब अपरान्ह 3.56 बजे से लेकर चार बजे तक तीन बार मोबाइल फोन पर संपर्क किया गया। इस दौरान उन्होंने मोबाइल फोन रिसीव करना मुनासिब नहीं समझा। ऐसे में संक्रामक बीमारियों के प्रति विभाग की चौकसी का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

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