यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 25, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
संक्रामक बीमारियों से सहमे लोग, विभाग उदासीन

श्रावस्ती: बरसात के बाद गुलाबी ठंड ने दस्तक दे दी है। इसके बावजूद भी संक्रामक बीमारियों का प्रकोप थम नहीं रहा है। मच्छरजनित बीमारियां जान ले रही हैं। विभाग उदासीन दिख रहा है। आलम यह है कि अस्पतालों में दवाइयों और डॉक्टरों की कमी मरीजों पर भारी पड़ने लगी है।
नेपाल सीमा पर स्थित श्रावस्ती जिले में दीपावली से पहले ही ठंड का एहसास होने लगा है। बदलते मौसम में डेंगू, दिमागी बुखार, खसरा, डायरिया, वायरल और मलेरिया जैसी बीमारियां लोगों को अपने चपेट में ले रही हैं। इन बीमारियों से कई की मौत भी हो चुकी हैं। सरकारी अस्पतालों में दवाओं का अकाल और डॉक्टरों की कमी मरीजों को काफी अखर रही है। निजी चिकित्सकों के दवाखानों में मरीजों की भीड़ बढ रही है। सरकारी अस्पताल से अच्छा लोग प्राइवेट चिकित्सकों से इलाज कराना चाहते हैं। नतीजतन झोलाछाप डॉक्टर चांदी काट रहे हैं। बारिश के बाद गुलाबी ठंड की आहट के साथ-साथ गांव-गांव में बीमारियां दस्तक दे रही हैं। अभी तक जिले में खसरा, डायरिया, दिमागी बुखार और डेंगू का कहर जारी है। कार्तिक का महीना लगते ही मौसम में परिवर्तन होने लगा है। सुबह-शाम ओस गिरने के साथ कोहरे की चादर में तराई लिपटी रहती है, जबकि दिन में धूप और रात में ठंड का एहसास होता है। गर्मी और ठंडी के बीच लोगों को बीमारियां सता रही हैं।
बीमारियों से ऐसे करें बचाव
श्रावस्ती : डॉ. राकेश चौधरी बताते हैं कि मच्छरजनित बीमारियों से बचने के लिए रात को खुले में न लेटे। गर्मी से आने पर तत्काल ठंडा पानी न पिएं। मच्छरदानी लगा कर ही सोएं। तुलसी व अदरक की चाय लाभकारी है। बीमार होने पर तुरंत डॉक्टर को दिखाकर परामर्श लें।
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