श्रावस्ती : तराई में तापमान लगातार गोते लगा रहा है। शुक्रवार को न्यूनतम पारा लुढ़क कर छह डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। कोहरे और पाले से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। गलन भरी बर्फीली हवा चलने से लोग बेहाल हैं। बादलों की लुका-छिपी से बारिश के आसार बने हुए हैं। लगातार पड़ रहे पाले से सरसों, आलू और केले की फसल को नुकसान हो रहा है। बढ़ी ठंड के बीच चौक-चौराहों पर बुझे पड़े अलाव राहगीरों को अखर रहे हैं।

शुक्रवार को सुबह हल्का कोहरा रहा। दोपहर बाद हल्की धूप खिली, लेकिन थोड़ी ही देर में सूर्यदेव बादलों में छिप गए। पछुआ हवा के चलने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। ठंड से मानव ही नहीं जीव-जंतु और पशु-पक्षी भी बेहाल हैं। दिन का अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम छह डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। पूरे दिन 13 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलती रही। आ‌र्द्रता 64 प्रतिशत रिकार्ड किया गया। चिकित्सक डा. एनएन पांडेय कहते हैं कि मौसम बदल रहा है। सुबह व शाम के समय अच्छी खासी ठंड पड़ रही है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही हमें बीमार कर सकती है। घर से बाहर निकलने पर गर्म कपड़े अवश्य पहनना चाहिए। इनसेट कोहरे-पाले से प्रभावित हो रही फसल

कृषि वैज्ञानिक डा. विनय कुमार ने बताया कि कोहरे-पाले से फसलों को बचाने के लिए किसान भाई गंधक के तेजाब का छिड़काव करें। इससे फसल के आसपास के वातावरण का तापमान बढ़ जाता है। साथ ही पपीते जैसी बागवानी फसलों पर भी पाले का असर पड़ता है, इसलिए प्लास्टिक की सीट से पौधे को ढकने पर अंदर का तापमान बढ़ता है। तापमान गिरने की वजह से फसलों में फफूंदीजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

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