राप्ती नदी का कहर: जमुनहा में तेजी से बढ़ रहा कटान, 45 बीघे खेत और फसलें नदी में समाईं
राप्ती नदी के बढ़ते जलस्तर से श्रावस्ती के जमुनहा क्षेत्र में भीषण कटान हो रहा है, जिससे हरिहरपुर और पिपरहवा ...और पढ़ें

HighLights
राप्ती नदी ने जमुनहा में 45 बीघे कृषि भूमि निगली।
धान, गन्ने की फसलें नदी की धारा में विलीन हुईं।
बहराइच-जमुनहा मार्ग पर कटान का खतरा मंडरा रहा।
संवाद सूत्र, मल्हीपुर(श्रावस्ती)। राप्ती नदी के घट-बढ़ रहे जलस्तर ने जमुनहा क्षेत्र के हरिहरपुर व पिपरहवा कोठी के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। तेजी से कटान करते हुए नदी खेतों में खड़ी धान व गन्ने की फसल को अपनी धारा में समाहित कर रही है। नदी अब तक करीब 45 बीघे कृषि भूमि व फसल को धारा में विलीन कर चुकी है।लगातार हो रही कटान को देख किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरा गई हैं।
नदी की धारा में किसान ओमकार चौधरी व नंदराम चौधरी की चार-चार बीघे, सुरपत सिंह व जगपत सिंह की पांच-पांच बीघे भूमि समा चुकी है। पिपरहवा कोठी निवासी किसान साबितराम की आठ बीघे, बंशीलाल की दो बीघे, जगराम चक्रवर्ती की पांच बीघे, साबित चक्रवर्ती की सात बीघे व लक्ष्मी जायसवाल की पांच बीघे भूमि व फसल भी नदी काट चुकी है। किसान भगतराम वर्मा, पंकज वर्मा, दीपक यादव व सुधीर सिंह समेत अन्य किसानों ने बताया कि नदी का कटान लगातार बढ़ रहा है।
बहराइच-जमुनहा मार्ग की ओर बढ़ रही नदी
ग्रामीणों को आशंका है कि यदि इसी तरह नदी कटान करती रही तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। किसानों का कहना है कि उनकी खड़ी फसल परिवार की रोजी-रोटी का मुख्य सहारा है। खेत में लगी उनकी गाढ़ी कमाई देखते ही देखते उनके आंखों के सामने नदी में समा रही है। नदी कटान करते हुए बहराइच-जमुनहा मार्ग की ओर बढ़ रही है।
मार्ग कटान की जद से मात्र 500 मीटर दूर बचा है। यदि कटान की रफ्तार नहीं थमी तो नदी की धार सड़क के करीब पहुंच सकती है। सड़क कटने से आसपास के गांवों के आवागमन पर भी असर पड़ने की आशंका है।
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ग्रामीणों का आरोप है कि बाढ़ खंड की ओर से कटान रोकने के लिए कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं। जमुनहा एसडीएम रवि प्रताप सिंह ने बताया कि कटान का सर्वे कराया जा रहा है। कटान के बारे संबंधित विभाग से बात कर स्थाई समाधान कराया जाएगा।
