श्रावस्ती : नेत्र रोगियों से पैसा वसूल कर उन्हें चश्मा उपलब्ध कराने के लिए जिला अस्पताल में अघोषित रूप से वर्षों से चश्मे की दुकान चल रही है। जिम्मेदार धंधे में इस कदर रम चुके हैं कि गरीब मोतिया¨बद पीडि़तों को भी नहीं छोड़ रहे हैं। चश्मे के लिए जमा होने वाले पैसे के बदले कोई रसीद भी नहीं दी जाती है।

मोतिया¨बद के ऑपरेशन के बाद पीड़ितों को काला चश्मा दिया जाता है। लगभग तीन सप्ताह तक आंख में दवा डालने के बाद आइसाइट की जांच होती है। इसके बाद चश्मे के लिए परामर्श दिया जाता है। अस्पताल से चश्मा लेने के लिए निर्धारित शुल्क जमा करने को कहा जाता है। यह पैसा 400 से 500 रुपये के बीच होता है। पैसा जमा होने के एक सप्ताह बाद चश्मे के लिए बुलाया जाता है। सरकारी विभाग में किसी भी काम के लिए पैसा जमा करने पर रसीद मिलने का नियम है, लेकिन चश्मे के लिए जमा होने वाले पैसे के बदले कोई रसीद नहीं दी जाती है। हरिहरपुररानी ब्लॉक के पटना खरगौरा गांव निवासी पुत्तीलाल जायसवाल ने बताया कि एक साल पूर्व आंख का ऑपरेशन कराया था। चश्मे के लिए पैसे नहीं थे तो दूसरे से उधार लेकर 500 रुपये दिए। इसके लगभग 10 दिन बाद चश्मा मिला था। लक्ष्मनपुर बाजार निवासी अयूब ने बताया कि लगभग पांच-छह साल पहले अपनी मां की आंख के मोतिया¨बद का ऑपरेशन कराया था। उस समय अस्पताल भिनगा सीएचसी में चलती थी। यहां आइसाइट के चश्मे के लिए 350 रुपये लिए गए थे। अब्दुल कलामनगर के मंशाराम ने बताया कि चश्मे के लिए खुलेआम पैसा मांगा जाता है। मना करने पर डांट भी सुननी पड़ती है। नई बाजार निवासी प्रेम कुमार ने बताया कि लगभग छह साल पहले नानी की मोतिया¨बद का ऑपरेशन कराया था। चश्मे के लिए बताया गया कि फ्री में नहीं मिलता है। पैसा न देने पर परचे पर आइसाइट लिखकर बाहर से चश्मा बनाने का परामर्श दे दिया गया। क्या कहते हैं सीएमओ

मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. वीके ¨सह ने बताया कि यह मामला संज्ञान में आया है। चश्मे के लिए पैसा नहीं पड़ता है। जांच के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जाएगी।

Posted By: Jagran

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