श्रावस्ती: विकास क्षेत्र हरिहरपुररानी का उदईपुर गांव शिक्षा को लेकर क्षेत्र का सबसे अग्रणी माना जाता है। यहां एक दर्जन से अधिक सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। विदेशों में भी उदईपुर के लोग अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। बताया जाता है कि रियासत के जमाने में यहां गोरखपुर से आए उदय नाथ मिश्र ने इस गांव को बसाया था। इसी के आधार पर गांव का नाम उदईपुर पड़ा। इस गांव के साहित्यकार पं. रामसूरत त्रिपाठी दूरदर्शन पर काव्य गोष्ठी में हिस्सा ले चुके हैं। स्वतंत्रता आंदोलन में यहां के पं. बृजलाल मिश्र व शोभाराम वर्मा ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। रियासत के समय में बना खपरैल मकान व प्राचीन कुंआ यहां आज भी स्थित है।

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इन पर है नाज-

उदईपुर के अशोक कुमार मिश्र अमेरिका में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। इनकी तरक्की पर गांव के लोगों को फक्र है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी शोभाराम वर्मा, तीन बार विधायक रहे कमला प्रसाद वर्मा, सेवानिवृत्त क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी सुशील कुमार मिश्र व साहित्यकार पं. रामसूरत त्रिपाठी मयंक का नाम इस गांव के लोग बड़े आदर के साथ लेते हैं।

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ये है खूबी-

सेवानिवृत्त तहसीलदार रामकृपाल मिश्र का ऐतिहासिक खपरैल का मकान यहां दर्शनीय है। इस गांव के सेवानिवृत्त शिक्षक जय प्रकाश शुक्ल, अलखराम शुक्ल, नरेंद्र मिश्र, बदलानंद मिश्र, आनंद स्वरूप, राम गोपाल मिश्र, राम फल आर्य आदि बच्चों व युवाओं को संस्कारवान बने रहने के लिए प्रेरित करते हैं। शिक्षा के प्रति समर्पण इस गांव के लोगों की मजबूती है।

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आधारभूत ढांचा-

उदईपुर गांव के चितईपुर, पयारघाट, कासिम पुरवा बेहनन पुरवा मजरे हैं। कुल आबादी लगभग 10 हजार है। इनमें कुल 3506 मतदाता हैं। गांव में पाइप लाइन से जलापूर्ति होती है। सभी मजरों में विद्युतीकरण है। गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क है। शिक्षा के लिए दो प्राथमिक व एक उच्च प्राथमिक विद्यालय स्थित है। स्वास्थ्य केंद्र व कोतवाली गांव से लगभग सात किमी दूर स्थित है।

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यह हो तो बने बात

-स्वास्थ्य सेवाओं के लिए गांव में एएनएम केंद्र स्थापित करने की जरूरत है।

-पशु चिकित्सा केंद्र की कमी भी लोगों को अखरती है।

-सबसे अधिक शिक्षित परिवारों गांव में इंटर कॉलेज नहीं है।

-ग्रामीण मैरिज हाल की आवश्यकता महसूस करते हैं।

-गांव के पूरब स्थित रास्ते पर पुलिया न होने से लोगों को घुटनों तक पानी उतर कर अपने खेतों में जाना पड़ता है।

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क्या कहते हैं ग्राम प्रधान

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-स्कूलों में सुंदरीकरण, इंडिया मार्का हैंडपंप का उच्चीकरण, सभी मजरों में विद्युतीकरण, आरसीसी रोड कार्य हुए हैं। उच्च शिक्षा के लिए गांव में विद्यालय की आवश्यकता है। इसके लिए प्रयास जारी हैं।

-सांवल प्रसाद मिश्र, ग्राम प्रधान, उदईपुर।

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-गांव में आवागमन के लिए रास्तों को दुरुस्त कराया गया था। परिवहन के साधनों की समस्या है। यह कमी पूरी हो जाए तो गांव और विकसित हो जाएगा।

-कामता प्रसाद वर्मा, पूर्व ग्राम प्रधान, उदईपुर।

Posted By: Jagran