संवादसूत्र, श्रावस्ती : तेज हवा के साथ बारिश व ओलावृष्टि से बर्बाद हुई रबी की फसल का मुआवजा किसानों को दिलाने के लिए टीम गांव-गांव सर्वे में जुट गई है। इसके लिए न्याय पंचायत स्तर से टीम का गठन किया गया है। बीमा कंपनी के प्रतिनिधि के साथ टीम क्षति का आकलन कर रही है।

बेमौसम बारिश से तराई में खेती-किसानी पूरी तरह चौपट हो गई है। ओलावृष्टि व तेज हवा के चलते गेहूं की फसल खेतों में गिर गई है। फसल का काफी हिस्सा क्षतिग्रस्त भी हुआ है। इसी प्रकार मटर, मसूर, चना, अरहर, सरसों, जौ आदि के खेतों में पानी भर जाने से फसल खराब हो गई है। खेतों में लहलहाती फसलों को देख अच्छे दिनों की आस देख रहे किसानों की कमर बारिश ने तोड़ दी है। क्षति का मुआवजा किसानों को दिलाने के लिए शासन के निर्देश पर कृषि विभाग सक्रिय हो गया है। प्रभारी उपकृषि निदेशक आरपी राना ने बताया कि न्याय पंचायत स्तर पर विभाग के तकनीकी सहायक तैनात हैं। इनके साथ लेखपाल व बीमा कंपनी के प्रतिनिधि गांव-गांव पहुंचेंगे। फसलों क्षति का आकलन कर रिपोर्ट देंगे। इसका भुगतान बीमा कंपनी की ओर से किया जाएगा। नुकसान 33 प्रतिशत से अधिक होने पर कृषि निवेश के तहत किसानों को क्षतिपूíत दी जाएगी। नुकसान की सूचना दें किसान

प्रभारी उपकृषि निदेशक ने बताया कि अतिवृष्टि, ओलावृष्टि व तेज हवा से फसल को हुए नुकसान की क्षतिपूíत बीमा कंपनी से लेने के लिए 72 घंटे के अंदर आवेदन भेजना होता है। ऐसे में किसान भाई स्वयं नुकसान की सूचना दें। इसके लिए कार्यालय में संपर्क करने के साथ बीमा कंपनी के टोल-फ्री नंबर 18002091415 व 1800120909090 पर फोन कर सूचना दे सकते हैं। अब तक 426 किसानों ने मुआवजे के लिए आवेदन किया है। इनमें से 67 की जांच पूरी करवाकर क्लेम रिपोर्ट कंपनी को भेज दी गई है।

Posted By: Jagran

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