शामली, जेएनएन। अपर दोआब चीनी मिल में आई खराबी के चलते पूरा शहर जाम हो गया। मिल गेट से लेकर करीब एक किलोमीटर तक गन्ने के वाहनों की कतार लगी रही। अफसरों के वाहन और एंबुलेंस भी जाम में फंसी। शादियों के सीजन में बरातियों को गंतव्य तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। धीमानपुरा फाटक से विजय चौक तक मात्र दो किलोमीटर की दूरी तय करते में लोगों को डेढ़ से दो घंटे का वक्त लगा। सोमवार अपराह्न तीन बजे से शुरू हुए जाम से देर शाम तक निजात नहीं मिली थी।

चीनी मिल सुचारू रूप से नहीं चल पा रही है। हर रोज खराबी आने से किसान तो परेशान हैं, आम जनता को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। रविवार रात करीब नौ बजे से लेकर रात करीब दो बजे तक तकनीकी खराबी के चलते मिल बंद रहा। वहीं, सोमवार दोपहर में भी तकनीकी खराबी आ गई, लेकिन गांवों से गन्ना लेकर पहुंचने वाले किसानों की संख्या बढ़ गई। इससे मिल गेट से लेकर फव्वारा चौक तक, हनुमान धाम होते हुए बुढ़ाना रोड तक और धीमानपुरा फाटक तक गन्ने से लदे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और भैंसा-बुग्गियों की कतार लग गई। शादियों का सीजन है, इससे सड़कों पर वाहनों का दबाव भी अधिक था। इससे शहर जाम के झाम में फंस गया। दोपहिया वाहनों और ई-रिक्शा आदि ने गलियों से निकलने की कोशिश की तो वहां भी जाम की स्थिति बन गई। पुलिस को यातायात व्यवस्था संभालने में पसीने छूट रहे थे। शाम के वक्त हालात ये बन गए कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया। शहर में जाम का असर बुढ़ाना रोड, दिल्ली रोड, कैराना रोड पर भी पड़ा। बुढ़ाना रोड और धीमानपुरा फाटक ट्रेन आने पर बंद होते रहे तो समस्या और विकराल होती रही। मरीजों को लेकर जाने वाली एंबुलेंस भी जाम में फंसी और उपजिलाधिकारी शामली को भी परेशान होना पड़ा। खैर, पुलिस ने किसी तरह इन वाहनों को जाम से निकलवाया। मिल के अतिरिक्त महाप्रबंधक (गन्ना) नरेश कुमार ने बताया कि रविवार रात करीब पांच घंटे मिल बंद रही थी। सोमवार दोपहर बाद गन्ने की आवक बढ़ गई, लेकिन कोई खास तकनीकी खराबी नहीं आई। मिल सुचारू रूप से चल रहा है।

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घरों में कैद हुए लोग

जाम से शहर के हालात बेहद खराब हो गए और ऐसे में लोगों ने बेहद जरूरी काम होने पर ही घर से निकलना ठीक समझा।

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तौल रही धीमी

टिटौली गांव से गन्ना लेकर आए किसान संजीव कुमार ने बताया कि तौल बेहद धीमी है। एक ट्रॉली व बुग्गी की तौल करने में 15 से 20 मिनट लिए जा रहे हैं। बीच-बीच में कुछ देर तौल बंद भी कर दी जाती है।

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व्यापारी हुए परेशान

रविवार को साप्ताहिक बंदी थी। सोमवार को सुबह से बाजारों में भीड़ थी, लेकिन दोपहर बाद लगे जाम ने व्यापारियों को भी परेशान कर दिया। ग्राहक कम हो गए। पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम दास गर्ग ने बताया कि प्रशासन से कई बार अनुरोध कर चुके हैं कि पेराई सत्र में लगने वाले जाम की समस्या का समाधान निकाला जाए।

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खूब हुई नोकझोंक

कुछ वाहन चालक दूसरे रास्ते से जाने के लिए किसानों से ट्रैक्टर-ट्रॉली पीछे करने के लिए कह रहे थे। किसानों का कहना था कि वह अपनी लाइन में चल रहे हैं। इस बात को लेकर खूब नोकझोंक हुई।

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नहीं परवान चढ़ी योजना

सीजन में जाम की समस्या हर साल आती है। प्रशासन ने पेराई सत्र शुरू होने से पहले समस्या का समाधान निकालने की कोशिश की थी। योजना के अनुसार शहर से बाहर ही क्रय केंद्र लगाकर गन्ना लिया जाना था। जिससे ट्रैक्टर-ट्रॉली और भैंसा-बुग्गी शहर में न आएं। इस योजना पर बात नहीं बन सकी। मिल प्रबंधन ने ऐसी व्यवस्था करने में हाथ खड़े कर दिए। दूसरी बात यह थी कि क्रय केंद्रों पर मिल गेट के मुकाबले गन्ने के कम दाम मिलते हैं।

Posted By: Jagran

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