शामली, जागरण टीम। वाह री-पुलिस, तेरी भी माया अपरंपार है। भले ही सामने चोरी का सामान पड़ा हो लेकिन पूछताछ नहीं करनी है, यदि मन आया, तो महिलाओं को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे भिजवा दिया। करनी मनमर्जी ही है। शामली पुलिस ने पड़ोसी जिला पुलिस से भी सबक लेना गंवारा नहीं किया।

मेरठ जिला चोरी के वाहनों को काटने के लिए पउप्र में बदनाम था। मेरठ के सोतीगंज में तो दुकानों पर खुलेआम नए-पुराने टायर व वाहनों के पार्टस की नुमायश लगी रहती थी। भाजपा शासन में अधिकारियों का चाबुक चला तो वहां से इस प्रकार का धंधा बंद करा दिया गया। बड़े स्तर पर कार्रवाई कर वाहनों के पार्ट्स बरामद किए गए। इस कार्रवाई का असर आसपास के सभी जिलों में दिखाई दिया। बावजूद इसके शामली पुलिस ने इससे कोई सबक नहीं लिया। शामली में दिल्ली रोड पर कुछ दुकानें ऐसी हैं, जिनके बाहर नए-पुराने टायर रखे हैं। यह दुकानें आज से नहीं, बल्कि पिछले कई साल से लगातार चलाई जा रही है।

विडबना है कि आज तक पुलिस ने कभी भी इन दुकानों पर जाकर यह पूछना या जानकारी करना गंवारा नहीं किया कि यह टायर या फिर पाटर््स कहां से आ रहे हैं। कहीं यह चोरी के वाहनों को काटने के बाद तो निकाले गए? इन हालातों में यह कहा जाए कि जिले में वाहन काटे जा रहे हैं, तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। जबकि हकीकत तो यह है कि जिले में किसी भी कबाड़ी के पास वाहन काटने की अनुमति नहीं है। यही कारण रहा कि थाना आदर्श मंडी व बाबरी पुलिस पूर्व समय में कई लोगों को चोरी के वाहन काटने के आरोप में पकड़ चुकी है। इसके बाद जिले में कहीं पर भी इस प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की गई।

यदि पिछले एक माह का रिकार्ड देखें तो जिले भर में डेढ़ दर्जन से अधिक बाइक चोरी की जा चुकी है। इन बाइकों का आज तक कोई सुराग नहीं लगा है। वाहन चोरी और वाहन कत्लखानों को लेकर आखिरकार कब जागेगी पुलिस। उधर, पुलिस अधीक्षक सुकीर्ति माधव ने सभी कबाड़ियों की सूची तैयार करने के आदेश दिए हैं।

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