जागरण संवाददाता, शामली। मौसम का मिजाज फिर बदला है। शनिवार अलसुबह से शुरू हुई बारिश रुक-रुककर शाम तक जारी रही। ऐसे में ठंड काफी बढ़ गई है। दिन (अधिकतम) का तापमान करीब छह डिग्री सेल्सियस कम हुआ है। शीतलहर का प्रकोप भी बना रहा। तापमान अधिकतम 12.1 और न्यूनतम सात डिग्री सेल्सियस रहा। जबकि शुक्रवार को तापमान अधिकतम 18 और न्यूनतम छह डिग्री सेल्सियस था।

जनवरी माह में अब तक दो से तीन दिन ही धूप निकली है, वो भी हल्की व कुछ समय के लिए ही निकाली। शनिवार सुबह करीब पांच बजे बारिश शुरू हो गई थी। कभी तेज तो कभी हल्की रही, लेकिन रुक-रुककर होती रही। सुबह लोग घरों से छाता लेकर ही निकले। ठंडी हवा भी चल रही थी तो लोग गर्म कपड़ों से लकदक रहे। साथ ही लोग टीनशेड आदि के नीचे अलाव भी तापते नजर आए। चाय की दुकानों पर तो दिनभर रौनक रही। क्योंकि दिन चढ़ने के साथ ठंड बढ़ती ही गई। ऐसे में अस्पताल से लेकर बाजारों तक भी भीड़ भी नहीं रही। शाम को ठिठुरन और अधिक बढ़ गई। ऐसे में बाजारों से लेकर मुख्य सड़कों पर देर शाम जल्दी ही सन्नाटा सा पसर गया। वहीं, बारिश के कारण अलाव की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। हालांकि नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी सुरेंद्र यादव ने बताया कि निर्धारित स्थानों पर लकड़ियां रखवाई जा रही हैं, लेकिन ऐसे स्थानों पर, जहां पर वह भीगे नहीं और लोग जरूरत के अनुसार इस्तेमाल कर सकें। रात के समय रैन बसेरे में लोग आ रहे हैं और सभी व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। वहीं, बारिश से आलू, गेहूं, सरसों की फसल को अधिक नुकसान है। कृषि विज्ञान केंद्र शामली के वैज्ञानिक डा. विकास मलिक ने बताया कि कुछ दिन पहले ही काफी बारिश हुई थी। ऐसे में किसी भी फसल को सिचाई की जरूरत नहीं है। गेहूं, सरसों की फसल को ठंड से फायदा ही होता है। लेकिन अब हो रही बारिश से नुकसान है। गेहूं की पत्तियां नीचे से पीली पड़ने का खतरा है, जिससे बढ़वार प्रभावित होगी। सरसों के फूल गिर रहे हैं। साथ ही 10-12 दिन पहले बुवाई की गई गेहूं की फसल का जमाव प्रभावित होगा। आलू की फसल में झुलसा रोग का प्रभाव बढ़ेगा। अभी एक-दो और बारिश हो सकती है तो गलन की समस्या भी आएगी। यही दिक्कत अन्य सब्जियों की फसल में भी होगी।

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