शामली, जेएनएन। जिले के अल्ट्रासाउंड सेंटर हरियाणा के निशाने पर हैं। भले ही लिग परीक्षण की बात सामने न आई हो, लेकिन तकनीशियन के अल्ट्रासाउंड करने से ही जिले के स्वास्थ्य विभाग पर भी सवाल खड़े होते हैं। हालांकि पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कई सेंटरों पर जाकर छापेमारी की थी।

शामली के साथ ही कैराना, कांधला समेत कई स्थानों पर गलत तरीके से अल्ट्रासाउंड सेंटरों का संचालन किया जा रहा है। कहीं रेडियोलाजिस्ट नहीं है तो किसी का पंजीकरण ही नहीं है। करीब डेढ़ माह पहले भी हरियाणा की टीम लिग परीक्षण की शिकायत पर शामली आई थी। लेकिन जो व्यक्ति टीम की महिला से बात रहा था, वह उसे लेकर शामली के बजाय सहारनपुर में ले गया था। बुधवार को कैराना में हरियाणा की टीम ने एक सेंटर छापेमारी की। लिग परीक्षण की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन तकनीशियन अल्ट्रासाउंड करता मिला। हरियाणा की टीम पहले भी शामली में छापेमारी कर चुकी है। वर्ष 2016 में शामली क्षेत्र के एक गांव में लिग परीक्षण का मामला पकड़ा था और स्वास्थ्य विभाग की एक कर्मचारी का नाम भी चर्चा में आया था।

मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डा. वीर बहादुर ढाका ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीम भी अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर छापेमारी करती रहती है। पंजीकरण आदि के बारे में जानकारी ली जाती है। साथ ही अवैध रूप से चल रहे अस्पताल, क्लीनिक, नर्सिंग होम पर भी कार्रवाई की जा रही है। पिछले दिनों कैराना में एक क्लीनिक सील भी किया गया था।

-एसडीएम से लगाई मदद की गुहार

नि:संतान दंपति ने एसडीएम को पत्र देकर सहायता की गुहार लगाई है। कैराना क्षेत्र के गांव मवी निवासी सोमपाल अपनी पत्नी के साथ में तहसील मुख्यालय पर पहुंचा। जहां उसने एसडीएम को एक प्रार्थना पत्र दिया। बताया गया कि उनके कोई संतान नहीं हैं। वह वर्तमान में झोपड़ी में अपनी जिदगी गुजार रहे हैं। बिजली व शौचालय तक की व्यवस्था नहीं हैं। सोमपाल ने बताया कि वह बीमार भी रहता है। दंपती ने एसडीएम से सहायता की गुहार लगाई।

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