ऑस्ट्रेलिया के व्यक्ति से 5 लाख ठगे, दो देशों में शिकायत के बाद शामली पुलिस ने उठाया ये कदम
आस्ट्रेलिया के एक व्यक्ति ने ऑनलाइन फर्नीचर खरीदने के लिए पांच लाख रुपये भेजे, बाद में पता चला कि कंपनी फर्जी थी। उसने साइबर हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। जांच में सामने आया कि रुपये पांच बैंक खातों में गए, जिनमें से एक शामली का था। लखनऊ मुख्यालय ने शामली पुलिस को ई-मेल भेजी।

जागरण संवाददाता, शामली। आस्ट्रेलिया निवासी एक व्यक्ति ने आनलाइन फर्नीचर खरीदा था। पांच लाख रुपये भेजने के बाद जानकारी हुई कि कंपनी फर्जी है। उसने आस्ट्रेलिया और भारत में साइबर हेल्पलाइन पर आनलाइन शिकायत दर्ज कराई थी। जांच में पता चला कि जिन पांच बैंक खातों में रुपये ट्रांसफर किए गए थे, उनमें एक शामली का था। लखनऊ मुख्ख्यालय से शामली पुलिस को ई-मेल भेजी गई।
शामली साइबर सेल ने शामली और राजस्थान के पांच खातों से पीड़ित के पांच लाख पांच हजार रुपये वापस करा दिए। आस्ट्रेलिया के क्यू विक्टोरिया निवासी यशायाह विटिंगस्लो ने सितंबर में फर्नीचर खरीदने के लिए आनलाइन वेबसाइट पर सर्च किया था। उनकी बात पियरे जेनरेट कंपनी के कर्मचारी से हुई थी। उसने बातों में उलझा लिया और पांच बैंक खातों में एडवांस पांच लाख पांच हजार रुपये मंगा लिए थे।
मोबाइल फोन और साइट की ब्लॉक
कुछ देर बाद व्यक्ति ने मोबाइल फोन और साइट ब्लाक कर दी। इसके बाद उन्हें जानकारी हुई कि फर्नीचर कंपनी फर्जी थी। उन्होंने 16 सितंबर को भारत की साइबर सेल और आस्ट्रेलिया में साइबर सेल को आनलाइन शिकायत दर्ज कराई थी। जांच शुरू हुई तो पता चला कि पांच भारतीय बैंक खातों में रुपये मंगाए गए थे।
इनमें चार राजस्थान और एक शामली निवासी व्यक्ति का बैंक खाता था। लखनऊ मुख्यालय को इस संबंध में ई-मेल भेजी गई। लखनऊ से शामली पुलिस को जांच सौंपी गई। साइबर सेल प्रभारी संजीव भटनागर ने बताया कि शामली के एक बैंक खाते में 25 हजार रुपये आए थे। बैंक में ई-मेल भेजकर रुपये होल्ड कराए गए। इसके राजस्थान के चार बैंक खातों को भी होल्ड कराया गया।
शनिवार को शामली साइबर सेल ने पांचों बैंक खातों से कुल पांच लाख पांच हजार रुपये आस्ट्रेलिया निवासी व्यक्ति के बैंक खाते में भिजवा दिए। एसपी एनपी सिंह ने टीम को बधाई दी है। उन्होंने बताया कि शामली निवासी जिस व्यक्ति के खाते में रुपये आए थे, उसकी जांच शुरू कर दी गई है। सभी बिंदुओं पर तफ्तीश चल रही है, ताकि गिरोह को पकड़ा जा सके।

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