VIDEO: शुभम के थकने पर सलीम बना सहारा, उठा ली उसकी 101 लीटर जल की कांवड़; दिखा दोस्ती और सामाजिक समरसता का रंग
कांवड़ यात्रा के दौरान एक मुस्लिम युवक सलीम मंसूरी ने अपने थके हुए हिंदू मित्र शुभम की कांवड़ 10 किमी तक उठाकर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश की।
HighLights
मुस्लिम युवक सलीम ने दोस्त की कांवड़ 10 किमी उठाई।
शामली में कांवड़ यात्रा के दौरान दिखा सांप्रदायिक सौहार्द।
103 वर्षीय प्रकाशी देवी को पोते ने कराई कांवड़ यात्रा।
जागरण संवाददाता, शामली। कांवड़ यात्रा के दौरान सांप्रदायिक सौहार्द और अटूट दोस्ती की एक अनोखी मिसाल सामने आई है। जहां एक ओर कांवड़ मार्ग पर शिवभक्तों का हुजूम उमड़ रहा है। वहीं, नगर के एक मुस्लिम युवक ने अपने मित्र की मदद के लिए मंगलौर से मुजफ्फरनगर के बीच कांवड़ उठाकर सौहार्द की मिसाल दी।
थानाभवन नगर के मुहल्ला रोगनग्रान (नई घासमंडी) निवासी रईस अहमद के पुत्र सलीम मंसूरी का कांवड़ उठाते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। सलीम ने खुद भगवा वस्त्र धारण कर हरिद्वार मार्ग पर अपने हिंदू मित्रों के साथ इस पवित्र सफर में सहभागिता की। मुहल्ला नबीपुर निवासी उसका मित्र शुभम उर्फ धुम्मा चार साल से कांवड़ लेकर आता है। इस बार उनके साथ सलीम भी गया था।
शुभम हरिद्वार से 101 लीटर जल का कलश लेकर कांवड़ यात्रा पर निकला था। रास्ते में मंगलौर के पास शुभम थकान के कारण आगे बढ़ने में असमर्थ महसूस करने लगा, तो सलीम सहारा बना। सलीम ने कांवड़ उठाकर करीब 10 किमी तक पैदल यात्रा तय की। सलीम ने अपने इस सफर के पलों को स्वयं अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर साझा किया है।
वीडियो सामने आने के बाद क्षेत्र के लोग सलीम की सराहना कर रहे हैं और इसे सामाजिक समरसता व पक्की दोस्ती की अद्भुत नजीर बता रहे हैं। शुभम मंगलवार को थानाभवन के कचोरीनाथ मंदिर में जलाभिषेक करेगा, जबकि उसका साथी केवल उसका सहारा बनने के लिए उसके साथ गया था। वह जलाभिषेक नहीं करेगा।
यह भी पढ़ें- यही है सनातन, यही है भारत! 'निजाम' के जनाजे को देख थमे हजारों कांवड़ियों के कदम, खामोश होकर दिया 'सौहार्द का रास्ता'
103 वर्षीय दादी को कंधे पर लेकर आया पोता और स्वजन

थाना भवन: क्षेत्र के गांव मोर माजरा निवासी 103 वर्षीय बुजुर्ग दादी प्रकाशी देवी को पोते और परिवार के अन्य स्वजन कंधे पर हरिद्वार से लेकर गांव पहुंचे। तीन अगस्त को हरिद्वार से कांवड़ यात्रा शुरू की थी।
स्वजन ने बताया कि प्रकाशी देवी की इच्छा थी कि वह एक बार भगवान भोलेनाथ की कांवड़ यात्रा का हिस्सा बनें। उनकी इच्छा पूरी करने के लिए पूरा परिवार एकजुट हुआ और उन्हें कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से थानाभवन तक लाया गया। बताया कि यह पहली बार नहीं है, जब प्रकाशी देवी ने कांवड़ यात्रा की है।
पिछले वर्ष भी परिवार के सदस्य उन्हें कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से गंगाजल लेकर आए थे। इस बार भी उनकी आस्था और इच्छा को देखते हुए परिवार ने दोबारा यह यात्रा कराई। प्रकाशी देवी ने कहा कि भगवान भोलेनाथ के दर्शन और उनकी भक्ति से उन्हें अपार शांति मिलती है। कांवड़ यात्रा पूरी होने के बाद परिवार द्वारा थानाभवन क्षेत्र के गांव पवारखेड़ा स्थित मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक किया।
