शामली, जागरण टीम। बुखार का प्रकोप बढ़ रहा है। डेंगू-मलेरिया का भी खतरा है, लेकिन शहर में एंटी लार्वा दवा के छिड़काव की व्यवस्था बेपटरी है। रोजाना सिर्फ एक-एक मोहल्ले में ही छिड़काव हो रहा है। पालिका प्रशासन का तर्क है कि स्वास्थ्य विभाग से दवा नहीं मिल रही, जबकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि दवा खरीद के लिए नगर निकायों का अपना बजट होता है।

नगर पालिका परिषद शामली में 25 वार्ड हैं। रैपिड कार्ड जांच में डेंगू के केस भी आ रहे हैं। हालांकि एलाइजा जांच में अभी तक पुष्टि नहीं हुई है। जिलाधिकारी जसजीत कौर ने एंटी लार्वा छिड़काव और फागिग नियमित रूप से कराने के निर्देश दिए हैं। मंडलायुक्त भी बैठक कर दिशा-निर्देश दे चुके हैं। इसके बावजूद शहर में न तो फागिग प्रभावी तरीके से हो रही है और न ही एंटी लार्वा का छिड़काव। नगर पालिका के सफाई एवं खाद्य निरीक्षक (कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी) आदेश सैनी ने बताया कि एक माह से स्वास्थ्य विभाग से एंटी लार्वा दवा नहीं मिली है। अब तीन लीटर दवा बची है। अगर पूरे शहर में एक बार छिड़काव हो तो एक लीटर दवा लगती है। इसलिए रोजाना एक-एक मोहल्ले में कर्मचारी जाकर छिड़काव कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से बात की तो कहा गया कि ग्रामीण क्षेत्र में बुखार के मरीज अधिक हैं तो थोड़े दिन बाद दवा मिलेगी।

वहीं संचारी रोग नियंत्रण के नोडल अधिकारी डा. जाहिद अली त्यागी का कहना है कि एंटी लार्वा दवा की कोई कमी नहीं है। सभी नगर निकायों को उपलब्ध कराया हुआ है। गांवों में भी लगातार छिड़काव हो रहा है। हालांकि नगर निकायों का एंटी लार्वा दवा खरीदने का अपना बजट होता है। खैर, कारण कुछ भी हो, लेकिन इस अव्यवस्था से सिस्टम पर सवाल खड़े होते हैं और डेंगू-मलेरिया फैलने का खतरा भी बढ़ा हुआ है।

Edited By: Jagran