शामली, जागरण टीम। शारदीय नवरात्र के अंतिम दिन महानवमी मनाई गई और घरों से लेकर मंदिरों तक मां सिद्धिदात्री की पूजा हुई। कुछ श्रद्धालुओं ने कन्या पूजन कर उन्हें भोजन भी कराया। इसके बाद मां की मूर्ति को विसर्जित किया।

सात अक्टूबर से नवरात्र शुरू हुए थे और बुधवार को महाष्टमी थी। अधिकतर श्रद्धालुओं ने महाष्टमी पर कन्या पूजन किया था, लेकिन कुछ श्रद्धालु के यहां कन्य पूजन महानवमी को होता है। सुबह मां आट्ठेवाला, हनुमान धाम स्थित मां दुर्गा मंदिर, वैष्णो मंदिर आदि में श्रद्धालु पहुंचे और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। घरों में दुर्गा सप्तशती के पाठ का समापन किया गया और फिर कन्याओं को बुलाकर उनका पूजन किया। कन्याओं को श्रद्धाभाव से पूजन कराने के बाद उपहार भी किए। पंडित कमल शास्त्री ने बताया कि मां सिद्धिदात्री की पूजा देवता भी करते हैं। मान्यता है कि अगर श्रद्धालु केवल महानवमी पर सिद्धिदात्री की पूजा करता है तो संपूर्ण नवरात्र की उपासना का फल मिलता है।

मां की ज्योति परिक्रमा में गूंजे मैया के जयकारे

संवाद सूत्र, जलालाबाद : जलालाबाद के श्री दुर्गा देवी मंदिर से मां की ज्योति परिक्रमा कस्बे के मुख्य मार्गो से निकाली गई।

कस्बे के श्री दुर्गा देवी मंदिर से अष्टमी पर प्रत्येक वर्ष मां की ज्योति की कस्बे में परिक्रमा की जाती है। बुधवार देर रात्रि में मां की ज्योति परिक्रमा का शुभारंभ लाला उपेंद्र गुप्ता व उनकी पत्नी रीना गुप्ता ने किया। ज्योति को श्री दुर्गा देवी मंदिर से ढोल नगाड़े व मां के भजनों के साथ लेकर श्रद्धालु मोती बाजार पहुंचे। मोती बाजार से कुरैशियान चौक होते हुए बोहरान मंदिर पहुंचे। यहां से श्रद्धालु मां के भवन के साथ बंबा चौक, भाईजान चौक से कटहरा बाजार और नीलगरान चौक रामनगर से होते हुए मां की ज्योति श्री दुर्गा देवी मंदिर पहुंची। जहां पर मां की ज्योति को स्थापित किया गया। ज्योति परिक्रमा में सभासद बबली कश्यप, प्रदीप कश्यप, आदेश गर्ग, अभिषेक शास्त्री, विश्वनाथ बिजलवान आदि का सहयोग रहा।

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