शामली, जागरण टीम। कोरोना काल ने हमें एक नई जिदगी जीना सिखा दिया है। दो साल तक स्कूल-कालेज समेत सब कुछ बंद रहे। इस दौरान स्वजन के साथ घरों में रहना हुआ। न स्कूलों में सहपाठियों के साथ बैठकर पढ़ाई करने का मौका मिला और न ही दोस्तों के साथ पार्टी। कोरोना काल ने हमें सिखा दिया है कि जिदगी जीने के लिए नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है और आगे भी नियमों का पालन करना ही होगा।

दैनिक जागरण के बुधवार अंक में प्रकाशित संस्कारशाला के बारे में स्काटिश स्कूल की प्रधानाचार्य आशु त्यागी ने कहा कि संस्कारशाला में प्रकाशित स्टोरी 'हम तो चले घूमने से बच्चों को बहुत कुछ सीखने को मिला है। उन्होंने कहा कि कैसे नियमों का पालन और सावधानी के साथ अब कोरोना सामान्य होने पर घूमने जा सकते हैं। स्टोरी में यह भी बताया गया है। स्वाधीनता संग्राम के आदर्शो का पालन करना भी सभी को चाहिए। सभी लोग स्वतंत्र है, लेकिन संविधान सभी के लिए है। नियमों का पालन सभी को करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्वाधीनता के आदर्शो को कायम रखना हमारा संवैधानिक क‌र्त्तव्य है। सभी को संविधान का पालन करना चाहिए। संविधान में सभी को सम्मान दर्जा प्राप्त है।

संविधान रोजगार में अवसर की समानता की बात करता है और धर्म, वंश, जाति और लिग के आधार पर भेदभाव को रोकता है तो वह महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा दे रहा होता है और यहां तक की जातिगत बंधनों को तोड़ रहा होता है। संविधान के प्रावधानों से भारतीय समाज के चेहरे को बदला जा सकता है और योग्यता के पनपने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। सर्वश्रेष्ठ को नेतृत्व के शीर्ष पदों पर जाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। हमारी प्रस्तावना भारतीय संविधान को समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष गणराज्य के रूप में स्थापित करने के बारे में बात करती है।

संविधान के नियमों का पालन हम सभी के लिए जरूरी है। प्रधानाचार्य ने कहा कि दैनिक जागरण के अंक में प्रकाशित होने वाली संस्कार शाला को सभी को पढ़ना चहिए। ऐसी कहानी को पढ़ने के बाद बहुत कुछ सीखने को मिलता है।

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-आशु त्यागी, प्रधानाचार्य स्काटिश इंटरनेशनल स्कूल शामली

Edited By: Jagran