शामली, आकाश शर्मा। विधानसभा चुनाव में हुकुम और हसन परिवार कई बार राजनीतिक रूप से आमने-सामने आए, लेकिन दोनों घरानों की बेटियां पहली बार एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव मैदान में होंगी। कैराना सीट पर एक ओर बाबू हुकुम सिंह की राजनीतिक विरासत संभाले उनकी बेटी मृगांका सिंह जीत के इरादे से उतरी हैं तो दूसरी तरफ राजनीति में अपना भविष्य तलाश रहीं हसन परिवार की इकरा हसन पहली बार चुनाव लड़ रही हैं। अंतिम दिन शुक्रवार को उन्होंने कैराना सीट से बतौर निर्दल प्रत्याशी नामांकन-पत्र दाखिल कर दिया। देखना यह है कि जीत का सेहरा किस परिवार के सिर सजता है।

पश्चिम यूपी के कद्दावर नेता और कैराना से पूर्व सांसद बाबू हुकुम सिंह ने अपनी राजनीतिक विरासत अपनी बेटी मृगांका सिंह को सौंप दी थी। मृगांका सिंह ने भाजपा के टिकट पर 2017 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था। बाबूजी से नाराज उनके भतीजे अनिल चौहान मृगांका के सामने रालोद के टिकट पर कैराना से चुनाव लड़े। वोट बंटने के कारण नाहिद हसन को जीत मिली थी।

बाबू हुकुम सिंह के निधन के बाद 2018 लोकसभा उपचुनाव में भाजपा ने मृगांका सिंह को उम्मीदवार बनाया। इस चुनाव में विपक्षी गठबंधन से स्व. मुनव्वर हसन की पत्नी तबस्सुम हसन ने जीत हासिल की। अब विधानसभा चुनाव 2022 में फिर मृगांका सिंह भाजपा से उम्मीदवार हैं।

उन्हें टक्कर देने के लिए हसन परिवार की बेटी इकरा हसन भी बतौर निर्दल उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतर गई हैं। उनके भाई और कैराना से सपा विधायक नाहिद हसन गठबंधन के प्रत्याशी हैं। नाहिद पर गैंगस्टर आदि के मुकदमे दर्ज होने के कारण पिछले एक साल से इकरा हसन ही उनकी तरफ से क्षेत्र में जनसंपर्क कर रही थीं।

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