शामली, जागरण टीम। कोरोना संकट ने हम सभी के सामने संकट का पहाड़ खड़ा कर दिया है। इस महामारी में कई बार अपने भी मरीज से दूरी बना लेते हैं। परिस्थिति चाहे जो हों, लेकिन वो साथ कभी नहीं छोड़ती हैं, जिन्हें हम सभी दुलार से सिस्टर कहते हैं यानी नर्स। परिवार के सदस्य की तरह मरीजों की देखभाल, छोटी-बड़ी सभी बातों का ध्यान रखती हैं। अपनी परवाह किए बिना कोविड मरीजों के उपचार से लेकर टीकाकरण व अन्य कार्यो में समर्पित भाव से ड्यूटी कर रही हैं। कुछ तो संक्रमण की चपेट में आ चुकी हैं। पहले कुंभ, अब कोविड में कमान

नर्सिग आफीसर एंजलीना सात मई से कोविड चिकित्सालय में ड्यूटी पर हैं। इससे पहले 22 दिन के लिए कुंभ हरिद्वार में तैनाती रही थी और 30 अप्रैल को ही वहां से आई। सावधानी का ध्यान रखते हुए वह काम कर रही हैं। बताती हैं कि पिछले साल भी कोविड में ड्यूटी रही थी, लेकिन पिछली बार से हालात पूरी तरह अलग हैं। परिवार को चिता होती है लेकिन उन्हें समझाती रहती हैं कि अगर स्वास्थ्यकर्मी हिम्मत नहीं दिखाएंगे तो मरीजों का क्या होगा। खैर, हम सभी नर्स मरीजों को दवा-इंजेक्शन देती हैं। तापमान, आक्सीजन स्तर की लगातार जांच करती हैं। आक्सीजन हटाकर भी देखते हैं कि मरीज की क्या स्थिति है। साथ ही चिकित्सक की सलाह पर कफ बाहर निकालने के लिए व्यायाम भी कराए जाते हैं। वाक के लिए भी प्रेरित किया जाता है। समर्पित भाव से निभा रही हैं जिम्मेदारी

नर्सिग आफिसर मोनिका ने जिले के सबसे पहले कोरोना मरीज की देखभाल की थी। इसके बाद भी लगातार कोरोना से जुड़ी ड्यूटी करती रही हैं। झिझाना के कोविड लेवल-1 चिकित्सालय में भी अपने दायित्व को निभाया। अब कोविड लेवल-2 अस्पताल में रात की शिफ्ट में ड्यूटी कर रही हैं। वह बताती हैं कि कोरोना का जब एक भी केस नहीं आया था, तब सीएचसी शामली में आइसोलेशन वार्ड था। तब उन्हें जिम्मेदारी मिली थी। पहले मरीज भर्ती होने आए तो उस वक्त थोड़ा नर्वस थी। काफी दिनों तक टीकाकरण में ड्यूटी करने के बाद कोविड मरीजों की देखभाल की जिम्मेदारी मिली है। वह पूरा ध्यान रखती हैं कि किसी मरीज को कोई दिक्कत न हो। मरीजों को हंसाने की भी कोशिश रहती है। संक्रमण को शिकस्त देकर मरीजों की देखभाल में जुटीं

सीएचसी शामली में नर्सिग आफिसर सुहानी बताती हैं कि पिछले साल भी कोविड अस्पताल में काफी दिन तक ड्यूटी की थी और बिना घबराए जिम्मेदारी को निभाया था। इसके बाद कोविड हेल्प डेस्क व अन्य कार्यों में भी ड्यूटी रही। फिर टीकाकरण को लेकर काम करती रहीं और अप्रैल माह में कोरोना की चपेट में आ गई थी। सांस लेने में थोड़ी दिक्कत महसूस हुई, लेकिन घर में रहते हुए ही जंग जीत ली। स्वस्थ होने के कुछ दिन बाद मेरी ड्यूटी कोविड लेवल-2 में लग गई। अधिकांश भर्ती मरीजों को आक्सीजन लगी है। पहले मेरी ड्यूटी कोविड लेवल-1 झिझाना में थी, क्योंकि यह अस्पताल बना नहीं था। सेवा ही हमारा धर्म-कर्म है। ड्यूटी के तहत मरीजों की देखभाल तो करती ही हूं, लेकिन इस वक्त में उन्हें हिम्मत देना भी जरूरी है कि वह ठीक हो जाएंगे और कोरोना को हरा देंगे। मरीजों के स्वजन की हिम्मत न टूटे, इस बात का भी ध्यान रखती हूं।

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