शामली, जेएनएन: विभिन्न मांगों को लेकर ईंट-भट्ठा मालिक दस दिसंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन करेंगे। शामली ईंट निर्माता समिति ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो श्रमिकों को साथ लेकर आंदोलन का बिगुल बजाया जाएगा।

कैराना रोड स्थित एक रेस्तरां में पत्रकारों से वार्ता में शामली ईंट निर्माता समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र मलिक ने कहा कि शामली के अधिकांश भट्ठे जिग-जैग प्रणाली में परिवर्तित हो चुके हैं। यह इसलिए एनजीटी के आदेश पर इसलिए कराया गया, जिससे प्रदूषण कम से कम फैले। इसके बावजूद एनजीटी ने 15 दिसंबर तक सभी भट्ठे बंद करा दिए हैं। हमारी सरकार, एनजीटी और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से गुजारिश है कि भट्ठों को चलाने के लिए एक अवधि तय कर दी जाए। एक बार भट्ठा चल जाता है तो बीच में बंद करने पर भारी नुकसान उठाना पड़ता है। दिल्ली में प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन अखिल भारतीय ईंट व टाइल निर्माता महासंघ के नेतृत्व में होगा। हमारी मांग है कि सरकारी निर्माण कार्य में फ्लाई ऐश ईंट का प्रयोग पूरी तरह प्रतिबंध किया जाए, क्योंकि इसमें रेडियो एक्टिविटी होती है, जिससे कैंसर, दमा, चर्म रोग आदि बीमारियां होने की आशंका होती है। भट्ठा संचालकों को दो मीटर तक खनन की छूट दी जाए और खनन से पूर्व स्वच्छता प्रमाण पत्र की बाध्यता को खत्म किया जाए। ईंट भट्ठों पर श्रमिक कानूनों में भी छूट देने की मांग है। साथ ही 25 फरवरी 2020 से लाल ईंट निर्माण पर प्रतिबंध की अधिसूचना को निरस्त किया जाए और ईंट मिट्टी को माइनर मिनरल से बाहर कर खनिज नीति में बदलाव किया जाए। बताया कि दस दिसंबर को जिले से करीब 150 ईंट भट्ठा संचालक दिल्ली जाएंगे। इस दौरान उपाध्यक्ष कृष्ण कुमार शर्मा, महामंत्री सुनील गोयल, कोषाध्यक्ष हरेंद्र सिंह, महिपाल सिंह, वेदपाल सिंह, विरेंद्र फौजी, अनिल कुमार, सतेंद्र, संदीप कुमार, अजय कुमार, योगेंद्र, गुलाब सिंह, संजय प्रधान, नीरज बालियान, वाहिद राणा, गुलजार अहमद, इमरान, धर्मेंद्र मलिक, गजेंद्र सिंह, देवेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

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