शामली, जेएनएन। गन्ना किसानों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। अगोला भेदक, पोका बोइंग के बाद अब फसल में फाल आर्मी वर्म कीट भी लग गया है। कई गांवों में इसका काफी प्रकोप देखने को मिल रहा है।

जून में गन्ने की फसल में टाप बोरर यानी अगोला भेदक कीट लग गया था। जुलाई में पोका बोइंग का प्रकोप भी शुरू हुआ था। तापमान और उमस अधिक होने के कारण अनुकूल मौसम रोग को बढ़ने के लिए मिला। हालांकि जुलाई के दूसरे सप्ताह में अच्छी बारिश हो गई थी। कृषि विज्ञान केंद्र शामली के वैज्ञानिक डा. विकास मलिक ने बताया कि फाल आर्मी वर्म कीट की मादा सफेद रंग की होती है और पत्तों पर 50 से 150 तक समूह में अंडे देती है। तीन से पांच दिन में सुंडी निकलर फसल की गोभ में चली जाती है और पत्तियों को खुरच-खुरच कर खाना शुरू कर देती है। सुंडी हल्के भूरे की होती है और उसके ऊपर तीन काले व तीन पीले रंग की धारियां होती हैं। मुंह पर उल्टे वाई आकार का निशान होता है। किसाना फसलों की निगरानी करें और लक्षण दिखने पर रोकथाम के उपचार करें। टिटौली, नया गांव, कसेरवा में काफी प्रकोप इसका दिखाई दिया है। गन्ने के साथ मक्का और धान को भी यह कीट काफी नुकसान पहुंचाता है। कीट ग्रस्त फसल के खेत में किसान गर्मियों में खोदाई करें, जिससे सुंडियां नष्ट हो जाएं। पौधे पर नीम के तेल का छिड़काव भी करें और कीटनाशक के यप में इमिडा क्लोरोपिड का एक एमएल प्रतिलीटर पानी या प्रप्रेनोफास व साइपर का दो एमएल प्रतिलीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।

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