कांधला: क्षेत्र के गांव गढ़ीदौलत के मदरसा जामिया बदरूल उलूम में सालाना जलसे का आयोजन किया गया। जलसे में पुलवामा में आतंकी हमले में शहीद हुए जवानों व न्यूजीलैंड की मस्जिद में शहीद हुए नमाजियों को खिराजे अकीदत पेश की। जलसे में जमीयत-उलेमा-ए-हिद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने दर्जनों तलबाओं की दस्तार बंदी की। इस दौरान हजारों लोग मौजूद रहे।

जलसे को खिताब करते हुए जमीयम-उलेमा-ए-हिद के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने फरमाया कि इस्लाम दहशतगर्दी और किसी पर भी जुल्म की इजाजत नही देता है। कहा कि दहशतगर्दो और जुल्म करने वाले की इस्लाम में कोई जगह नहीं है। हजरत मौलाना सलमान उस्ताद देवबंद दारुल उलूम ने फरमाया कि मुसलमानों के पास जिदगी से भी बड़ी चीज ईमान है। उन्होंने कहा कि हर चीज बिक सकती है, लेकिन ईमान कभी नहीं बिक सकता है। हजरत मौलाना शौकत अली ने फरमाया कि अल्लाह ने जो दौलत हम लोगों की दी है, उस दौलत से हम लोग गरीब, बेसहारा, गरीब लड़कियों की शादी कराने सहित धर्म के नाम पर खर्च करने से सवाब मिलता है। जलसे को मदरसे के प्रबंधक हजरत मौलाना आकिल साहब, हजरत मौलाना नुरूल राशिद साहब सहित आदि लोगों ने खिताब किया। जलसे में हजरत मौलाना महमूद मदनी साहब ने 57 तलबाओं की दस्तार बंदी की। हजरत मौलाना मदनी साहब ने देश में अमनों अमान के लिए दुआ कराई। जलसे में मौलाना अथहर, मौलाना ईस्त्राइल, मुफ्ती इमरान, मौलाना तैय्यब, मौलाना दिलशाद, मौलाना खुर्शीद, कारी मुस्तकीम गंगेरू, मौलाना बदरूल हुदा सहित मुस्लिम समाज के हजारों लोग मौजूद रहे।

Posted By: Jagran

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