शाहजहांपुर : बुखार से लोगों की मौतों का सिलसिला जारी है। शासन व प्रशासन की सख्ती का भी कोई असर नहीं दिख रहा है। रोकथाम करने की बजाय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इन मौतों को बुखार से होने से इन्कार कर रहे हैं। पिछले चौबीस घंटे के दौरान अलग-अलग स्थानों पर तीन अन्य लोगों की बुखार से मौत हो गई।

कोठामंझा में बालक की मौत

जलालाबाद : बुखार का प्रकोप क्षेत्र में लगातार बढ़ता ही जा रहा है। क्षेत्र के ग्राम कोठमंझा निवासी जगपाल के सबसे छोटे पुत्र समरपाल (9) की मौत हो गई। जगपाल ने बताया कि बेटे को शनिवार को बुखार आया तो दहेना गांव के एक झोलाछाप से दवा दिला दी, जिससे उसकी बुखार उतर गया। बुधवार सुबह 11 बजे समरपाल को फिर से बुखार चढ़ा तो वह बझेड़ा गांव में झोलाछाप के पास गया, लेकिन दवा दिलाने के बाद भी आरामन नहीं मिला। दोपहर बाद जलालाबाद में निजी चिकित्सक के पास गया। वहां से दवा लेकर वापस आते समय बेटे की मौत हो गई। समरपाल जगपाल के छह बच्चों में सबसे छोटा था। वह प्राथमिक विद्यालय में कक्षा तीन का छात्र था। सूचना मिलने पर सीएचसी से पहुंची टीम ने गांव में कैंप लगाया। यहां 177 लोगों का चेकअप किया, जिसमें लगभग दो दर्जन बुखार से पीड़ित मिले।

कई और हैं बीमार

इसी गांव मे देवेश की पत्नी रूबी (22) बुखार से पीड़ित है। शुक्रवार को उसने बच्ची को जन्म दिया था। मंगलवार शाम रूबी को अचानक तेज बुखार आया। परिजन निजी चिकित्सक के पास ले गये तो उसने जिला अस्पताल ले जाने की सलाह दी। गांव के ही पातीराम का 20 वर्षीय पुत्र रमाकांत मलेरिया से पीड़ित है।

स्वास्थ्य कैम्प लगायानगर के पुरुषोत्तम आदर्श कन्या इंटर कालेज में सीएचसी के डॉ. अनुराग ने टीम के साथ स्वास्थ्य कैम्प लगाया। उन्होंने स्वास्थ्य परीक्षण कर दवाएं वितरित कीं। इस मौके पर प्रधानाचार्य श्रद्धा टंडन, एकता त्रिपाठी, शमिन्दर ¨सह, डॉ. आशा आदि मौजूद रहे।

मेडिकल कालेज में तोड़ा दम

कांट : मिठहा गांव निवासी बलवीर ¨सह का बेटा शिवम 17 वर्ष को नौ सितंबर को बुखार आया था। गांव में झोलाछाप से इलाज कराया। सुधार न आने पर परिजन नगरिया सीएचसी ले गये। वहां हालत ¨चताजनक देखते हुए मेडिकल कालेज सैफई रेफर कर दिया गया, जहां बुधवार तड़के करीब तीन बजे उसकी मौत हो गई। शिवम का शव दोपहर घर पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया, वह दो भाई व दो बहनों में दूसरे नंबर पर था।

भाजपा नेता की मौत

बंडा : बुखार से पीड़ित कस्बा निवासी वरिष्ठ भाजपा नेता अनिल ¨सह 50 वर्ष की मौत हो गई। अनिल के बड़े यशपाल ¨सह ने बताया कि उसके पिता को चार दिन पहले बुखार आया था। कस्बे में डॉक्टर से इलाज चल रहा था। रात उनकी हालत बिगड़ गई। उन्हें शाहजहांपुर के निजी अस्पताल में लेकर गये, लेकिन वहां भी डॉक्टर नहीं मिले। इस पर परिजन बरेली लेकर गये, लेकिन रास्ते में फतेहगंज के पास अनिल ¨सह ने दम तोड़ दिया।

सप्ताह भर से नहीं लाभ

स्वास्थ्य केंद्र के बाहर गांव मोहदीनपुर की द्रोपदी व ओमप्रकाश सुबह नौ बजे से बुखार से पीड़ित अपनी पुत्री दो वर्षीय पायल को लेकर बैठे थे। ओमप्रकाश ने बताया कि एक सप्ताह से बेटी को बुखार आ रहा है। यहां दवा लेने का कोई फायदा नहीं हो रहा। वह प्राइवेट अस्पताल जाने की सोच रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्र में प्रतिदिन पांच से छह सौ मरीज आ रहे हैं, जिनमें अधिकांश बुखार से पीड़ित हैं। ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर रहीसुल हसन ने बताया कि दोपहर दो बजे ढाई से तीन सौ मरीज देखते हैं। सभी का चेकअप संभव नहीं है। लोगों का आरोप है कि दवा वितरण केंद्र पर प्राइवेट कर्मी रखे गये हैं।

सीएचसी प्रभारी मनोज मिश्र ने बताया कि यहां पर डॉ. रहीसुल हसन, डॉ. महेंद्र पाल, डॉ. रिजवान, समेत चार डाक्टरों की तैनाती है। उन्होंने बताया कि वह स्वयं अवकाश पर हैं। महेंद्र पाल भी छुट्टी पर हैं। ऐसे में दो रहीसुल हसन के साथ डॉ. रिजवान को होना चाहिये था। उन्होंने बताया कि दवा वितरण कक्ष में प्राइवेट कर्मियों की जानकारी नहीं है वह जांच कराएंगे। गढ़ा में भी प्रकोप

निगोही : क्षेत्र के गढ़ा गांव में बुखार का प्रकोप काफी है। यहां पर दर्जनों लोग बुखार की चपेट में हैं। गांव निवासी एसपाल ¨सह की बड़ी पुत्री शशि (19) की बुखार के कारण मौत हो चुकी है। शशि का भाई मोनू बीमार है। इसी गांव के चीता, राजपाल ¨सह, गायत्री, जितिन, पुष्पा, अंकिता, निक्का, प्रीती आदि बुखार की चपेट में हैं। ग्रामीणों ने बताया कि सूचना के बाद कोई भी स्वास्थ्य टीम गांव नहीं आई है। वहीं सीएचसी प्रभारी डॉ नरेंद्र पाल का कहना कि उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

सालमपुर में कई लोग बुखार की चपेट में

कटरा : क्षेत्र के सालपुर गांव में भी काफी लोग बुखार की चपेट में हैं। गांव निवासी राजेंद्र प्रसाद की बेटी ¨रकी देवी 20 की बुखार के कारण तीन दिन पहले मौत हो चुकी है। राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि उनकी बेटी का चार अप्रैल को विवाह हुआ था। उन्होंने बताया कि बेटी मायके आयी थी, तभी बुखार की चपेट में आ गई। उसका गांव में ही उपचार करा रहे थे, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ।

Posted By: Jagran