शाहजहांपुर, जागरण संवाददाता: कलान तहसील में कार्यरत तहसीलदार ने भूमाफिया से मिलकर चारागाह और मरघट की 152 बीघा जमीन करीब 12 लोगों के नाम कर दी। वह भी शातिराना अंदाज में। भ्रष्टाचार को अंजाम देने के लिए तहसीलदार धर्मेंद्र पांडेय ने पुवायां तैनाती के दौरान तहसील सदर से फाइल को पुवायां स्थानांतरित कराया। इसके बाद लेखपाल की रिपोर्ट बगैर उसका दाखिल खारिज कर दिया। जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट पर राजस्व परिषद आयुक्त व सचिव मनीष त्रिघाटिया ने तहसीलदार को निलंबित कर दिया है।

फाइल स्थानांतरित कराकर मामले को दिया अंजाम

भ्रष्टाचार का यह मामला तहसील सदर के परगना जमौर के गांधार क्षेत्र का है। पिपरौला से कमलनयनपुर की ओर जाने पर यहां सीएच-41 व 45 में कई खसरा नंबर की करीब 8.31 हेक्टेयर (करीब 124.65 बीघा) जमीन चारागाह तथा खसरा नंबर 1189 की 1.870 हेक्टेयर (करीब 28 बीघा) भूमि मरघट के रूप में दर्ज थी। 

क्षेत्र के करीब 12 लोगों ने माफिया से मिलकर सुरक्षित श्रेणी को जमीन का फर्जी बैनामा करा दिया। दाखिल खारिज के लिए तहसील सदर में वाद दायर कर दिया। तहसील सदर में दाखिल खारिज न होने पर माफिया ने पुवायां में तैनात तहसीलदार धर्मेंद्र पांडेय से संपर्क साधा। उनकी हां मिलने पर अपर आयुक्त बरेली से फाइल को पुवायां स्थानांतरित करा लिया गया। यहां तहसीलदार ने सुरक्षित श्रेणी की जमीन का दाखिल खारिज कर दिया।

इस तरह हुआ खुलासा

सरकारी अधिवक्ता जदुवीर सिंह ने मामले को पकड़ा। डीएम ने जांच कमेटी गठित कर दी। करीब तीन सप्ताह की जांच के बाद भ्रष्टाचार का राजफाश हुआ। जिलाधिकारी ने सितंबर में रिपोर्ट शासन को भेज दी। लेकिन वहां मामले को दबा दिया गया। जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने जब शासन स्तर पर बात तब खलबली मची। राजस्व परिषद सचिव व आयुक्त ने वर्तमान में कलान में कार्यरत तहसीलदार धर्मेंद्र कुमार पांडेय को निलंबित कर दिया।

इन्होंने कहा…

जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने बताया कि कलान के तहसीलदार धर्मेंद्र कुमार पांडेय ने चारागाह तथा मरघट की सुरक्षित श्रेणी की जमीन को अवैध तरीके से दाखिल खारिज कर दिया। मामले की जांच कराई गई। शासन ने जांच रिपोर्ट के अध्ययन के बाद तहसीलदार को निलंबित कर दिया है।

Edited By: Shivam Yadav

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