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जिंदा मिलने की आस खत्म, बस शव मिल जाए... गंगा में डूबे 4 बेटों के लिए तड़प रहे शाहजहांपुर के ये परिवार

Published: Thu, 17 Sep 2026 11:43 PM (IST)

फर्रुखाबाद में गंगा में डूबे शाहजहांपुर के चार युवकों के शव एक माह बाद भी नहीं मिले हैं। परिजनों की ...और पढ़ें

परिवार के साथ घर के बाहर उदास बैठे प्रमोद व उनके स्वजन। जागरण

परिवार के साथ घर के बाहर उदास बैठे प्रमोद व उनके स्वजन। जागरण

HighLights

  1. 17 अगस्त को गंगा में डूबे थे चारों, नहीं मिल सके अब तक शव

  2. एनडीआरएफ ने खड़े किए हाथ, निराश होकर घर लौटे स्वजन

जागरण संवाददाता, शाहजहांपुर। आंसू सूख चुके हैं, आंखें पथरा गईं हैं। चमत्कार की उम्मीद भी लगभग खत्म है। जो बुढ़ापे का सहारा थे, अब उनका शव मिलने की प्रार्थना कर रहे हैं...। यह कहते-कहते प्रमोद फफक पड़े। सावन में फर्रुखाबाद कांवड़ भरने गए बेटे, भाई, चचेरे भाई सहित चार लोग गंगा में डूब गए थे।

बोले, बेटे को घर आने में जरा देर हो जाती तो परेशान हो जाते थे। अब तो चेहरा देखे हुए पूरा एक महीना बीत गया। रात में नींद नहीं आती, कलेजे में हूक उठती है।

मोबाइल पर कोई भी अंजान काल आती है तो शरीर कांपने लगता है, क्योंकि जिस सूचना का इंतजार कर रहे हैं, उसे सुनने की शक्ति नहीं है। खुदागंज निवासी प्रमोद का बेटा योगेश, अपने चाचा विकास, कमल व पड़ोसी अर्जुन के साथ 17 अगस्त को नहाते समय गहरे पानी मे जाने से गंगा में डूब गए थे।

एनडीआरएफ जुटी, लेकिन हद के बाहर उफना रही गंगा में सारे प्रयास विफल रहे। तीन दिन बाद में सरकारी कोशिशें थमीं, लेकिन प्रमोद का मन न माना।

रिश्तेदारों व स्थानीय गोताखोरों के साथ इस उम्मीद से गंगा के सभी घाट व किनारे घूमते रहे, कि शायद उनके बच्चे मिल जाएं, लेकिन आठवें दिन उनकी भी हिम्मत टूट गई।

रिश्तेदारों के समझाने पर लौट आए। दिन गुजरे, सप्ताह बीते, गुरुवार को एक माह हो गया। अब उम्मीद कमजोर पड़ने लगी है। बोले, जीवन भर ग्लानि रहेगी कि जिनके कंधे पर अर्थी जानी थी।

उन्हीं के लिए गंगा मैया से प्रार्थना कर रहे हैं कि शव मिल जाएं तो क्रियाकर्म कर दें। फर्रुखाबाद प्रशासन पानी कम होने तक इंतजार करने के लिए कह रहा है। अधिकारियों को क्या पता कि परिवार का एक-एक दिन कैसे कट रहा है।

चारों घरों में पसरी उदासी

प्रमोद की पत्नी सोनी देवी बेटे की फोटो को देख पूरा दिन बिलखती रहती हैं। मां शांति देवी छोटे बेटे विकास के पास रहती थीं। रोज बेटे और पोते के बारे में पूछती हैं। चचेरे भाई कमल व अर्जुन के स्वजन भी परेशान हैं।

घरों में उदासी पसरी है। प्रमोद ने बताया कि चारों परिवार चाट का ठेला लगाकर गुजर बसर करते हैं। कई दिन खाली रहे, लेकिन पेट पालना है, इसलिए फिर से काम शुरू कर दिया।