UP में बिना बताए गायब 20 डॉक्टरों का हिसाब! 13 की सेवा खत्म करने की संस्तुति, 2 के इस्तीफे नामंजूर
शाहजहांपुर में 14 वर्षों से अनुपस्थित 20 चिकित्सकों में से 13 की सेवा समाप्त करने की संस्तुति की गई है। ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड है।
HighLights
पांच अन्य की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में, दो ने भेजे त्यागपत्र, नहीं हुए स्वीकार
जागरण संवाददाता, शाहजहांपुर। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की जिम्मेदारी जिन चिकित्सकों को सीएचसी पीएचसी में तैनाती दी गई, वे कुछ दिन बाद ही बिना सूचना के गायब हो गए। 14 वर्षों से लापता चल रहे 20 चिकित्सकों को कई बार विभाग से नोटिस भेजे गए, लेकिन जवाब नहीं मिले। जबकि 13 की सेवा समाप्त करने की संस्तुति कर कार्रवाई शासन को भेज दी गई है।
पांच अन्य चिकित्सकों पर भी कार्रवाई प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। दो ने अपना त्यागपत्र भेज दिया है, जिसे स्वीकार नहीं किया गया है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों के 197 पद हैं। इसके सापेक्ष सिर्फ 67 की यहां तैनाती है, जिसमें डिप्टी सीएमओ भी शामिल हैं।
वर्ष 2012 के बाद अब तक 20 ऐसे चिकित्सक हैं, जो अवकाश पर जाने के बाद से लौटे ही नहीं। डा. संजय कुमार ने वर्ष 2023, प्रभात मिश्र ने वर्ष 2021 में व्यक्तिगत कारणों का हवाला देकर त्यागपत्र भेज दिया था, जो अब तक स्वीकृत नहीं हुआ है।
13 ऐसे चिकित्सक हैं, जिन्हें कई बार नोटिस भेजने से लेकर उनके घरों तक पर जानकारी कराई गई, लेकिन वापस सेवा में आने के लिए कोई जवाब नहीं मिला।
ऐसे में उन चिकित्सकों की सेवा समाप्त की कार्रवाई शासन स्तर तक पहुंच गई है। जिस पर जल्द कार्रवाई तय मानी जा रही है। इसके अलावा डाॅ. सतेंद्र कुमार, डाॅ. रणविजय, डाॅ. रिजवान अमहद, डाॅ. सर्वेश वर्मा, डाॅ. विमलेन कुमार भी कई वर्षों से अनुपस्थित चल रहे हैं।
इन चिकित्सकों को भी अंतिम नोटिस जारी करते हुए सेवा समाप्त करने की कार्रवाई निदेशालय स्तर तक भेजी जा चुकी है। जहां से शासन को कार्रवाई के लिए रिपोर्ट जल्द पहुंचने की उम्मीद है।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने गुरुवार को प्रदेश के 26 चिकित्सकों की सेवा समाप्त कर दी। जबकि नौ के विरुद्ध जल्द कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। ऐसे में अब जल्द शाहजहांपुर में तैनात रहे चिकित्सकों पर भी कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है।
वर्षों से अनुपस्थित रहने के कारण प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सकों की कमी बनी हुई है, जिसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। जो चिकित्सक तैनात हैं, उन पर अतिरिक्त बोझ है। कई स्वास्थ्य केंद्र तो एक-एक चिकित्सक या फिर फार्मासिस्ट के सहारे ही चल रहे हैं।
जो चिकित्सक लंबे समय से अनुपस्थित हैं उनकी सेवा समाप्त करने की रिपोर्ट भेजी जा चुकी है। कम संसाधन होने के बाद भी मरीजों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का हरसंभव प्रयास किया जा रहा है।
- डाॅ. विवेक मिश्रा, सीएमओ
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