विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

पहले सहती थीं, अब लड़ती हैं... शाहजहांपुर में तीन तलाक के खिलाफ दर्ज हुए 10 मामले, कानून ने दी लड़ने की ताकत

Published: Sun, 04 Oct 2026 04:07 PM (IST)

शाहजहांपुर में तीन तलाक कानून लागू होने के बाद महिलाओं में न्याय के लिए लड़ने का हौसला बढ़ा है। जनवरी से अब तक 10 प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं।

जनवरी से अब तक तीन तलाक के 10 मामलों में पुलिस दर्ज कर चुकी प्राथमिकी।

जनवरी से अब तक तीन तलाक के 10 मामलों में पुलिस दर्ज कर चुकी प्राथमिकी।

HighLights

  1. तीन तलाक कानून से महिलाओं को न्याय की ताकत मिली।

  2. शाहजहांपुर में जनवरी से अब तक 10 केस दर्ज।

  3. महिलाएं अब उत्पीड़न के विरुद्ध आवाज उठा रही हैं।

अजयवीर सिंह, शाहजहांपुर। कभी तलाक-तलाक-तलाक... एक ही सांस में बोले गए तीन लफ्ज किसी महिला की पूरी जिंदगी खत्म कर देते थे। वह चुपचाप अपने बच्चों को लेकर मायके लौट जाती थी। समाज के भी ताने सुनने पड़ते थे लेकिन अब कहानी बदल रही है।

मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण कानून लागू होने के बाद उत्पीड़न के विरुद्ध महिलाएं चुप्पी तोड़कर न्याय पाने के लिए थाने से लेकर न्यायालय तक अपनी आवाज उठा रहीं है। सदर थाने में शनिवार कराया गया ताजा मामला इसका उदाहरण है, जहां पीड़िता ने दहेज के लिए तीन बार तलाक बोलकर घर से निकालने का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया है।

18 सितंबर को मीरानपुर कटरा के इस्लामनगर निवासी एक महिला ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। महिला ने बताया कि निकाह के कुछ दिन बाद ही उसे दहेज के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा। दो जून को उसने बेटी को जन्म दिया था लेकिन बेटी के जन्म के छह दिन बाद ही उसे घर से निकाल दिया गया।

कुछ दिन बाद पति ने उसके मायके आकर तीन बार तलाक बोलकर रिश्ता खत्म कर लिया। महिला की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हैं लेकिन फिर भी खुद व मासूम बेटी को उसका हक दिलाने के लिए घर की चार दीवारी से बाहर निकालकर न्याय के लिए आवाज भी उठाई।

जनवरी से अब तक अलग-अलग थानों में तीन तलाक की 10 प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। यह केस बताते है कि कानून ने महिलाओं को न सिर्फ अधिकार दिया है, बल्कि अन्याय के खिलाफ बोलने का हौसला भी।

वरिष्ठ अधिवक्ता व मध्यस्थ सुलह समझौता केंद्र गुलिस्ता खान ने बताया कि तीन तलाक का कानून बनने के बाद से महिलाओं में निश्चिततौर पर जागरुकता बढ़ी है। पहले इस तरह के मामले थाने व न्यायालय तक पहुंचते ही नहीं थे। महिलाएं घर में ही उत्पीड़न सहती रहतीं थी। जब महिलाएं अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाएंगी तो धीरे-धीरे इस तरह के मामलों पर अंकुश भी लगेगा।

फोन और राह चलते दिए तलाक

शहर के एक मुहल्ला निवासी महिला का निकाह 31 अगस्त 2022 को हुआ था। दहेज में उससे बाइक व एक लाख रुपये के लिए प्रताड़ित किया जाने लगा। गर्भवती होने पर महिला मायके चली गई थी। बेटी को जन्म दिया था लेकिन पति उसे दोबारा मायके से लेने नहीं गया।

कुछ दिन बाद फोन पर तीन बार तलाक बोलकर रिश्ता खत्म कर लिया। इसके अलावा सदर निवासी एक अन्य महिला को पति ने कचहरी के पास राह चलते तलाक दे दिया था। महिला गुजारा भत्ते के लिए कचहरी तारीख पर गई थी।

केस वन

तिलहर के एक मुहल्ला निवासी महिला ने आठ जनवरी को दहेज में एक लाख रुपये व बाइक के लिए तलाक देने की प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

केस दो

निगोही के एक मुहल्ला निवासी महिला को 20 अप्रैल में पति ने कार न मिलने पर तलाक दे दिया था।अगले दिन पति ने दूसरा निकाह कर लिया था।

केस तीन

शहर के एक मुहल्ला निवासी महिला ने दहेज में फार्च्यूनर न देने पर पति पर तलाक देकर घर से निकालने की प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

केस चार

सिंधौली के एक गांव निवासी महिला को चार बच्चे होने के बाद दूसरा निकाह करने के लिए युवक ने तलाक दे दिया था।

  • 10 प्राथमिकी तीन तलाक की 2023 में दर्ज हुई।
  • 11 प्राथमिकी तीन तलाक की 2024 में दर्ज हुई।
  • 13 प्राथमिकी तीन तलाक की 2025 में दर्ज हुईं।
  • 10 प्राथमिकी जनवरी से अब तक दर्ज हो चुकीं।
  • 1157 मामले जनवरी से 30 सितंबर तक परिवार परामर्श केंद्र पर पहुंचे
  • 750 मामले दहेज प्रकरण से संबंधित हैं।
  • 298 मामलों का निस्तारण होने पर रिश्ते टूटने से बच गए।