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रिटायरमेंट के बाद भी नहीं तोड़ा चाक-डस्टर से नाता, बिना वेतन 300 बच्चों को पढ़ा रहे गणित का पाठ

Published: Sun, 06 Sep 2026 10:45 PM (IST)

सेवानिवृत्त शिक्षक रामसेवक शर्मा शाहजहांपुर के राजकीय इंटर कॉलेज में कक्षा 11 और 12 के छात्रों को निःशुल्क गणित पढ़ा ...और पढ़ें

क्लास में छात्रो कसे पढाते शिक्षक रामसेवक शर्मा। सौ. स्वयं

क्लास में छात्रो कसे पढाते शिक्षक रामसेवक शर्मा। सौ. स्वयं

HighLights

  1. सेवानिवृत्त शिक्षक रामसेवक शर्मा राजकीय इंटर कॉलेज में निःशुल्क गणित पढ़ाते हैं।

  2. वे जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में शिक्षकों को भी प्रशिक्षित करते हैं।

  3. गणित लैब बनाकर और मॉडल तैयार करवाकर छात्रों में रुचि जगाई।

अजयवीर सिंह, शाहजहांपुर। शिक्षक कभी सेवानिवृत्त नहीं होते, वह जीवन भर शिक्षा की लौ जलाते हैं। चमकनी मुहल्ला निवासी रामसेवक शर्मा भी दो वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त हुए, लेकिन चाक-डस्टर से नाता नहीं तोड़ा।

पूर्व माध्यमिक विद्यालय कुरसंडा में शिक्षण कार्य के बाद अब राजकीय इंटर कॉलेज में सूत्रों से विद्यार्थियों के जीवन का गणित गढ़ रहे रहे हैं। रामसेवक का मानना है कि दिखावे के बजाय कर्म पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है।

एक शिक्षक का मुख्य उद्देश्य यह होना चाहिए कि कैसे युवा कुशल और जिम्मेदार नागरिक बनें। इसी सोच के साथ वे बिना किसी मानदेय के रोजाना कॉलेज पहुंचकर कक्षा 11 के 150, कक्षा 12 के करीब 140 विद्यार्थियों को गणित पढ़ा रहे हैं। उनकी कक्षाओं में न सिर्फ सूत्र, बल्कि जीवन के अनुशासन की भी सीख मिलती है।

2011 में जब वे सेवा में थे, तब उन्होंने अपने विद्यालय में गणित की लैब बनवाई थी। उस समय परिषदीय विद्यालयों में गणित लैब की कल्पना भी कठिन थी। उन्होंने अपने प्रयासों से चार्ट, माडल, ज्यामितीय आकृतियों के माध्यम से बच्चों में गणित के प्रति रुचि पैदा की।

उनकी यह लैब आज भी बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र है और कई विद्यालयों के लिए प्रेरणा बनी। उन्होंने एक वाट्सएप ग्रुप भी बना रखा है। उसके माध्यम से राष्ट्रीय आय आधारित एवं योग्यता की परीक्षा की तैयारी कराते हैं। इसमें 100 से अधिक शिक्षक जुड़े हैं। ताकि शिक्षक बच्चों को आसानी से जानकारी दे सकें।

इस तरह शुरू किया सफर, भोपाल तक पहुंचाया माडल

राजकीय इंटर कॉलेज में गणित विषय के शिक्षक सिर्फ तीन हैं, जो सभी कक्षाओं में नहीं पढ़ा पाते हैं। रामसेवक को जब इसकी जानकारी हुई तो वह राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य अनिल कुमार से मिले।

उनसे बच्चों को निश्शुल्क पढ़ाने की इच्छा जाहिर की। पहले तो प्रधानाचार्य को यह सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ, लेकिन बाद में जो वजन दिख रहा था उसे महसूस करते हुए बिना देर किए सहमति दे दी।

दरअसल, वह खुद इस तरह के शिक्षकों की तलाश में थे। यह क्रम शुरू हुए करीब दो वर्ष हो चुके हैं, लेकिन रामसेवक ने कोई अवकाश नहीं लिया।

उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज में रेखा गणित का माडल विद्यार्थियों से तैयार कराया, जो जिला स्तर से चयनित होकर राज्य फिर नेशनल के लिए भोपाल में आयोजित प्रदर्शनी में शामिल किया गया था, जिसे खूब सराहा गया।

शिक्षकों में बांट रहे ज्ञापन

रामसेवक शिक्षा की जो लौ फैला रहे हैं, वह सिर्फ विद्यार्थियों तक ही सीमित नहीं हैं। वे जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में शिक्षकों को भी निश्शुल्क प्रशिक्षण देने जाते हैं।

शिक्षकों को गणित पढ़ाने की सरल तकनीक, बाल मनोविज्ञान और कक्षा प्रबंधन के गुर सिखाते हैं। उनके प्रशिक्षण सत्रों में शिक्षक पूरे मनोयोग से शामिल होते हैं। वे खुद भी राज्य स्तरीय तमाम प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।

इंटर कॉलेज में हो गया था चयन

वर्ष 1999 में उनका बेसिक शिक्षा विभाग में चयन हुआ। वर्ष 2002 में उप्र माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में टीजीटी के माध्यम से कौशांबी में इंटर कॉलेज में गणित पद पर चयन हो गया था, लेकिन परिस्थितिवश वहां जाने के बजाय जिले में ही अपनी सेवाएं देने को प्राथमिकता दी थी।

रामसेवक शर्मा राजकीय इंटर कॉलेज में कक्षा 11 व 12 के विद्यार्थियों को निश्शुल्क पढ़ा रहे हैं। बिना वेतन के इतनी निष्ठा से पढ़ाना आज के समय में विरला ही देखने को मिलता है।

-अनिल कुमार, प्रधानाचार्य राजकीय इंटर कॉलेज