गन्ने का 'कैंसर' भी नहीं छुड़ा पा रहा 0238 से किसानों का मोह, सामने आए चौंकाने वाले कारण
गन्ने की 0238 प्रजाति में लाल सड़न रोग (रेड राट) के बावजूद किसान इसका मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं, ...और पढ़ें

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HighLights
रेड राट के कारण गन्ना उत्पादन व चीनी परता हो रहा कम
अधिकारियों के प्रयास से इस बार घटा रकबा, दिए कई विकल्प
जागरण संवाददाता, शाहजहांपुर। चीनी के भाव बढ़े तो गन्ने को लेकर चिंता बढ़ी.., कैश क्राप के साल दर साल घटते रकबे पर सवाल उठे, जवाब में मक्का सहित अन्य वैकल्पिक फसलों के प्रति बढ़ते रुझान व अन्य कारण गिनाए गए, लेकिन परता क्यों गिरा?, इसके कारण तलाशे गए तो प्रमुख वजह में गन्ना प्रजाति 0238 भी बताई गई।
रेड राट (लाल सड़न रोग) से प्रभावित हो यह गन्ना किस्म अब भी प्रदेश के तमाम किसानों की पसंद बनी हुई है। कम लागत में बेहतर उत्पादन देने वाली इस प्रजाति रेड राट से प्रभावित हुई तो उसका सीधा असर चीनी परता पर पड़ने लगा। गन्ना विभाग ने इसके विकल्प में कई प्रजातियां दीं, लेकिन किसान इससे दूरी नहीं बना पा रहे।
वर्ष 2025-26 में प्रदेश में आठ लाख हेक्टेयर में इसे लगाया गया जो प्रदेश कुल गन्ना क्षेत्रफल का 44 प्रतिशत है। जिस कारण उत्पादन प्रभावित हुआ, चीनी परता भी अपेक्षाकृत नहीं मिल सका। इस बार रकबा घटा है, प्रदेश में इसका क्षेत्रफल 25 से 30 प्रतिशत के बीच है।
इसलिए किसान नहीं छोड़ रहे मोह
प्रति हेक्टेयर औसतन एक हजार क्विंटल उत्पादन देने वाली यह गन्ना प्रजाति अधिक तापमान में (अप्रैल से जून के बीच) भी अन्य गन्ना किस्मों की तुलना में तेजी से वृद्धि करती है। कम लागत में 12 प्रतिशत रेड राॅट लगने पर (10 से भी कम) चीनी परता देती है।
जबकि अन्य प्रजातियां अधिकतम 10 से 11 प्रतिशत ही दे पाती हैं। वर्ष 2011 में प्रदेश के किसानों ने इसे अपनाया। अगले दो वर्षों के अंदर इसका क्षेत्रफल 90 प्रतिशत तक हो गया। 2016 में रेड राॅट ने इसे जकड़ा तो कई खेतों में उत्पादन शून्य हो गया।
शोध परिषद ने दिए कई विकल्प
गन्ना शोध परिषद से रेड राॅट के प्रति मध्यम रोग रोधी प्रजाति कोशा 13235, 18231, 17231,19231 जैसी अगेती प्रजातियां विकसित की हैं। जिनका उत्पादन भी लगभग 0238 के बराबर ही है।
इनके अतिरिक्त लखनऊ संस्थान की लख. 14201, कोलख 16202 भी लग रही हैं, कुछ प्रजातियों में उत्पादन 900 क्विंटल ही मिल रहा है। लागत भी अधिक लग रही है। इसलिए किसान 0238 का मोह नहीं छोड़ पा रहे।
गन्ना शोध परिषद के वैज्ञानिकों ने दो नए स्ट्रेन स्टेनोट्रोफोमोनास माल्टोफिलिया बी 2132 व स्यूडोमानेास स्टडजेरी बी 2133 खोजे हैं। जिनसे रेड राॅट रोधी बीज तैयार करके प्रदेश के सभी गन्ना उत्पादक 48 जिलों के किसानों को उपलब्ध कराया जाएगा।
रेड राॅट को गन्ने का कैंसर भी कहा जाता है, यह बीमारी चीनी परता कम कर देती है। उत्पादन शून्य हो जाता है। 0238 की इसके प्रति प्रतिरोधक क्षमता कम हो गई है। इसलिए किसानों को बीज उपचारित करके ही लगाने की सलाह दी जाती है। रोग के लक्षण दिखते ही संबंधित पौध को वहां से हटाने, जलाकर नष्ट करने, पौध के स्थान पर ब्लिचिंग पाउडर डालने जैसे उपाय अपनाने की सलाह दी जाती है।
- डाॅ. अनिल कुमार, जिला गन्नाधिकारी
