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मंडी में ₹42, बाजार में ₹60: महज 6 किमी के फासले पर ₹18 महंगा हुआ प्याज; जानिए क्या है खेल

Published: Sat, 29 Aug 2026 06:56 PM (IST)

शाहजहांपुर में प्याज के थोक और फुटकर भाव में ₹18 प्रति किलो का बड़ा अंतर है, जिस पर प्रशासन का ...और पढ़ें

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HighLights

  1. थोक व फुटकर भाव में बड़ा अंतर, प्रशासन की ओर से नहीं दिया जा रहा ध्यान

  2. मौसम के प्रभाव, फसल की खराबी के कारण आवक कम होने को बता रहे कारण

जागरण संवाददाता, शाहजहांपुर। प्याज के भाव क्यों बढ़ रहे, इस सवाल को लेकर व्यापारियों के पास अलग-अलग तर्क व जवाब हैं। कोई बड़े उत्पादक राज्यों में बरसात के कारण आवक कम बता रहा है तो किसी को बड़ी मंडियो में जमाखोरी की शिकायत है, लेकिन थोक मंडी से फुटकर बाजार में आने वाले प्याज के दाम में 18 रुपये किलो के हिसाब से अंतर होने पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं है।

प्रशासन की ओर से भी इस पर अंकुश लगाने को लेकर ध्यान नहीं दिया जा रहा। प्याज के दाम पिछले 20 दिन में तेजी से बढ़े हैं। रोजा की थोक मंडी में व्यापारी इसका कारण पुणे, नासिक सहित प्याज के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में हुई अधिक बरसात के कारण फसल प्रभावित होना बता रहे हैं। इसका असर कीमतों पर दिखाई दे रहा है।

यहां की मंडी महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से आने वाली प्याज पर काफी हद तक निर्भर है। इन क्षेत्रों में आवक कम हुई है। रोजा मंडी में पिछले एक सप्ताह में करीब 5500 क्विंटल प्याज की आवक हुई है। जो सामान्य दिनों की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत कम है।

मंडी में प्याज का थोक भाव 35 से 42 रुपये किलो तक पहुंच गया है, जबकि यहां से छह किमी. दूर शहर की फुटकर बाजार में यही प्याज 60 रुपये किलो तक बिक रहा है।

फुटकर विक्रेताओं का कहना है कि मंडी से प्याज खरीदने के बाद कमीशन, ढुलाई और खराब निकलने वाली प्याज का खर्च भी जोड़ना पड़ता है।

इसलिए थोक और फुटकर भाव में अंतर आता है। यह हर बार होता है, थोक में रेट सामान्य दिनों में 22 से 25 रुपये किलो मिलता है। इस समय भाव बढ़े हैं तो फुटकर बार पर असर पड़ना तय है।

थोक मंडी में 42 रुपये में मिलने वाला प्याज फुटकर विक्रेता को पांच प्रतिशत कमीशन जोड़ने पर प्याज करीब 45 से 46 रुपये किलो पड़ता है। एक बोरी में दो से पांच किलो तक प्याज खराब निकलने की स्थिति रहती है। ढुलाई और अन्य खर्च जोड़ने के बाद फुटकर विक्रेता को 10 से 20 रुपये किलो तक लाभ रखना पड़ता है। इससे बाजार में प्याज का भाव 60 रुपये किलो तक पहुंच रहा है। - भगवान शरण, थोक विक्रेता

किसानों से प्याज खरीदकर उसे गोदामों में रखने की व्यवस्था भी बाजार में भाव बढ़ने का एक कारण है। महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में व्यापारियों को भंडारण के लिए सुविधाएं मिलने से फसल का स्टाक किया जाता है। बाद में मांग के अनुसार प्याज बाजार में बेचा जाता है। - मोहम्मद आसिफ

 

जिले में प्याज की खेती मुख्य रूप से रबी के मौसम में होती है। खरीफ में प्याज की खेती बहुत कम होती है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात प्रमुख प्याज उत्पादक क्षेत्र हैं। इस बार इन राज्यों में रकबा कम होने के साथ बरसात से फसल प्रभावित हुई है। इससे उत्पादन पर असर पड़ा है। स्थानीय स्तर पर प्याज का भंडारण किए जाने जैसी जानकारी सामने नहीं आई है।

- पुनीत पाठक, जिला उद्यान अधिकारी


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