शाहजहांपुर, जेएनएन। पापा...आप बहुत खराब हो। हमें छोड़कर चले गए। अब मैं आपसे कभी बात नहीं करूंगी, आप तो डॉक्टर बनाने की बात कर रहे थे, अब हमारे और कृष्णा का प्रॉमिस कौन पूरा करेगा.., मम्मी का क्या होगा। आप जेंटलपरसन और भलाई की बात करते थे, तो आपका दुश्मन कौन बन गया। किसने कर दी पापा की यह हालत..। हर आंख को नम और हृदय को चीरने वाले वेदना और विलाप भरे यह शब्द थे राकेश यादव की बेटी कशिश के..। जो पिता की अर्थी उठने पर बदहवास हो गई।

...रात भर बहने वाले आंसू आंखों से सूख चुके थे, लेकिन उसका करुण कंदन से हर किसी का हृदय द्रवित हो रहा था। कभी वह मां बबिता से लिपटकर उनसे पूछती पापा कहां चले गए..। क्यों रूठ गए मेरे प्यारे पापा..। बाबा गिरंद के कंधे पर सिर रखकर वह सवाल करती, पापा को क्यों जाने दिया। चाचा कमल यादव उसे ढांढस बंधाते हुए खुद के आंसू नहीं रोक पा रहे थे। मामा वीरेश यादव बार बार उसे समझाते, संभालते। चाची रेखा यादव, मौसी प्रेमलता ढांढस बंधाते हुए खुद भी बेहोश हो रही थी।

11 वर्षीय भाई कृष्णा व बिब्बी की आंखों में आंसू थे, वह पापा कहते हुए कभी मां से लिपट जाता तो कभी दादा गिरंद के पास जाकर उनसे पापा को क्या हो गया सवाल करते हुए उन्हें निरुत्तर कर देता। मत ले जाओ, छोड़ दे मेरे लाल को बेटे के शव के पास बैठी आशा यादव बेहोश की हालत में थीं। अर्थी उठने पर वह चिल्ला उठी, छोड़ दो मेरे लाल को। शवयात्रा के पीछे पीछे वह काफी दूर चली गई। परिजनों ने बड़ी मुश्किल से उन्हें संभाला। राकेश की इकलौती बहन शिखा उर्फ अंजू बार बार बेहोश हो रहीं थीं। राकेश के छोटे भाई राजेश यादव बेहद दुखी थे। सभी को धीरज बंधाते रहे पिता गिरंद 60 साल की उम्र में गिरंद यादव पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। अर्थी उठने पर आंसुओं का सैलाब था, लेकिन गिरंद सभी को धीरज बंधाते नजर आए। सब्र करो, हिम्मत रखो कहते हुए वह पूरे समय आंसुओं को आंखों से छलकने से रोकने की कोशिश करते रहे।

यह था पूरा मामला

सोमवार को लोक निर्माण विभाग में ठेकेदार राकेश यादव व उनके साथी निजी अंगरक्षक कुलदीप जायसवाल उर्फ सोनू पर हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की थी। इस घटना में राकेश की मौत हो गई थी, जबकि सोनू का निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है।

पैतृक रंजिश को दूर करने में लगे थे राकेश

राजकीय ठेकेदार राकेश यादव पैतृक रंजिश को खत्म में जुटे थे। उन्होंने कई मामलों को वार्ता के जरिए सुलटा भी लिया था। ब्रेन हैमरेज से उबरने के बाद कई बार उन्होंने किसी नए शहर में आशियाना बनाने का भी मन बनाया। मां बाप को भी इसके लिए मना रहे थे। पुरानी दुश्मनी को भुलाकर वह नई जिंदगी की शुरूआत में लगे थे। लेकिन उनका यह व्यवहार किसी को रास नहीं आया और लोक निर्माण विभाग के परिसर में दफ्तर के गेट पर ही छह गोलियां जिस्म में उतार कर हत्या कर दी। मंगलवार को अंत्येष्टि में पहुंचे लोग राकेश यादव के व्यवहार की ही चर्चा कर रहे थे। लोगों की माने तो राकेश लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों व कर्मचारी व ठेकेदारों से व्यवहार काफी मधुर था।

पहले राकेश की रीढ़ पर मारी गोली, फिर किया मुझ पर फायर

ठेकेदार राकेश यादव के साथी व निजी अंगरक्षक कुलदीप जायसवाल उर्फ सोनू इस केस का चश्मदीद गवाह है। सोनू ने बताया कि वह राकेश के साथ दोपहर पीडब्ल्यूडी गया था। उस समय लाल जैकेट व काली जींस पहने एक युवक पाॢकंग की तरफ बाइक पर बैठा मोबाइल फोन पर बात कर रहा था। दोनों ने उसे देखा, लेकिन जानते नहीं थे इसलिए अंदर कार्यालय में चले गए। वहां से बाहर आने के बाद राकेश फोन पर किसी से बात करने लगे। वह उनके सामने खड़ा था। तभी लाल जैकेट वाला युवक आया और उसने पीछे से राकेश की पीठ पर गोली चला दी, जो उनकी रीढ़ में लगी। जब तक वह कुछ समझ पाता पीछे से आए दूसरे युवक ने उस पर गोली चला दी। इसके बाद लाल जैकेट पहने युवक ने राकेश पर कई फायर किए। जबकि दूसरे युवक ने उसके एक गोली और मार दी।

हत्यारे का पुलिस ने जारी किया स्केच

लोक निर्माण विभाग के राजकीय ठेकेदार राकेश यादव के एक हत्यारे का पुलिस ने गुरुवार को स्केच जारी कर दिया है। दूसरे को देखे न जा सकने के कारण उसका स्केच नहीं बन सका है। हत्यारों तक पहुंचने में सर्विलांस की भी मदद ली जा रही है। आपराधिक गतिविधियों में लिप्त करीब चार हजार लोगों के फोटो कार चालक व घायल साथी को दिखाए जा चुके हैं। दावा किया जा रहा है कि हत्यारों को जल्द ही पकड़ लिया जाएगा। 

अब तक पुलिस के हाथ नहीं लगा कोई सुराग

हत्या का खुलासा करने में पुलिस की पांच टीमें जुटी हुई हैं। ठेकों से लेकर पारिवारिक रंजिश व पुराने विवादों को भी खंगाला जा रहा हैै, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है। राकेश यादव के परिजनों से पूछताछ की गई, लेकिन उन्होंने किसी तरह की रंजिश से इन्कार किया है। 

पुलिस तलाश रही आसपास जिलों में कनेक्शन

अब तक की पड़ताल के आधार पर पुलिस को जो जानकारी मिली है, उससे माना जा रहा है कि हत्यारे दूसरे जिले के थे। उन्हें किसने राकेश की हत्या करने के लिए बुलाया था। वह व्यक्ति शहर का ही है या फिर किसी दूसरे जिले का। उसने राकेश की हत्या क्यों कराई। हत्यारे कहां से आए थे और उनकी भागने में मदद किसने की। इन सब सवालों का जवाब तलाशने के लिए पुलिस टीमें हर बिंदु पर जांच कर रही हैं। कुछ टीमें आसपास के जिलों में हत्या का कनेक्शन तलाश रही हैं। 

अब तक चार हजार से ज्यादा दिखाए गए फोटो 

राकेश की हत्या के चश्मदीद कुलदीप जायसवाल उर्फ सोनू व कार चालक शादाब को पुलिस अब तक अपराधिक गतिविधियों में लिप्त करीब चार हजार लोगों के फोटो दिखा चुकी है। आसपास के थानों से भी हिस्ट्रीशीटरों व शूटरों के फोटो मंगवाकर दिखाए गए। इस काम में जेल प्रशासन की भी मदद ली गई है। पुलिस का मानना है कि हत्या करने वालों ने राकेश की कई दिन से रेकी की थी। ऐसे में जरूर वे लोग उनके घर से लेकर कार्यस्थल तक आने जाने पर नजर रख रहे होंगे।

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