जेएनएन, शाहजहांपुर : कोच में बहुत भीड़ थी..। किसी तरह मां, भाभी व भतीजी को एक सीट पर बैठा दिया था। दोनों भाई कोच में अलग-अलग जगह पर जाकर खड़े हो गये। बरेली तक तो सफर सही से कटा, लेकिन उसके बाद जो हुआ सपने में नहीं सोचा था। ¨चतादेवी के बेटे रंजीत ने बताया कि वे तीन लोग थे और ऊपर की बर्थ पर बैठे थे। उन्होंने सिगरेट जलायी। टोकने पर मां के साथ बदतमीजी शुरू कर दी। भीड़ के कारण वहां किसी तरह से पहुंचे तब तक उन लोगों ने मां के साथ मारपीट शुरू कर दी थी। वे लोग आगे बढ़े तो उन्हें भी पीटा। भाभी बबिता पर भी हाथ छोड़ा। इसके बाद मां को धक्का दिया और सोनू ने उनकी गर्दन पर पैर रख दिया। उसके बाद मां बेहोश हो गईं, फिर होश में नहीं आयीं। रास्ते भर मां को होश में लाने की कोशिश करते रहे। रंजीत, राहुल व बबीता का रो-रो कर हाल बेहाल था। कह रहे थे कि आंखों के सामने मां को मार डाला और वे लोग कुछ नहीं कर पाये।

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मां ने की थी दूसरी शादी

रंजीत कुमार ने बताया कि उसकी मां ¨चता देवी की शादी रंग बहादुर ¨सह निवासी राजपुर जिला रोहतास के साथ हुई थी। वह, उसका भाई राहुल, दो बहनें मनीषा व काजल हैं। पांच वर्ष पहले पिता की हार्ट अटैक से मौत हो गई, जिसके बाद उसकी मां ने तीन वर्ष पहले अपने देवर सुनील कुमार ¨सह से कोर्ट मैरिज कर ली थी। सुनील उन लोगों के साथ जालंधर में रहते हैं। जबकि बहनें व परिवार के अन्य लोग गांव में स्थित घर पर। छठ पूजा वे लोग मां के साथ घर जा रहे थे, जबकि पिता को जालंधर में ही छोड़ दिया था।

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दस साल से जलंधर में काम करते है

रंजीत ने बताया कि वह, उसका पिता व भाई बेलचा बनाने की कंपनी में काम करते हैं। जालंधर में वे लोग पठानकोट बाईपास पर किराये के मकान पर रहते है। घटना के बाद गांव में भी कोहराम मचा है। वहां से रिश्तेदार शव लेने के लिए यहां आ रहे हैं।

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अंबाला में किन्नर से हुआ था झगड़ा

बकौल रंजीत अंबाला स्टेशन पर दो किन्नर कोच में चढ़ आए थे। किन्नर ने बधाई के नाम पर रुपये की मांगे तो तीनों युवकों का उनसे झगड़ा हुआ था। यात्रियों ने दोनों पक्षों को समझाकर शांत कराया था। इसके बाद तीनों युवक रास्ते भर उत्पात करते आये।

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फोटो 10 एसएचएन : 12

आज तय होनी थी शादी

आरोपित सोनू ने बताया कि वह जालंधर में प्लंबर का काम करता है। वह भी पठानकोट बाईपास पर किराये के मकान में हरता है। उसके पिता व भाई आजमगढ़ में घर पर रहते हैं। सोनू ने बताया कि घरवालों का फोन आया था। उन्होंने बताया कि उसे देखने के लिए शनिवार को लड़की वाले आ रहे हैं। इसलिए वह घर जाने के लिए इसी ट्रेन में बैठा था। सोनू ने बताया कि वह अन्य दोनों आरोपितों को नहीं जानता। बस इतना पता है कि वे दोनों बिहार जा रहे थे। सोनू ने कहा कि वह सिगरेट भी नहीं पी रहा था। उस पर गलत आरोप लगाया जा रहा है।

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यहां नहीं है स्टापेज

रेलवे सुरक्षा बल के प्रभारी निरीक्षक वीके ¨सह ने बताया कि जलियावाला एक्सप्रेस का यहां स्टापेज नहीं है। बरेली से छूटने के बाद लखनऊ रुकती है। उन्होंने बताया कि जीआरपी तथा आरपीएफ का एस्कोर्ट की इस ट्रेन में ड्यूटी नहीं रहती है। अगर एस्कॉर्ट होता तो अन्य आरोपित भी पकड़े जाते।

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सुरक्षित नहीं हैं ट्रेनें

करीब पांच माह पहले 12 जुलाई को चंड़ीगढ़ एक्स्त्रपेस में महिला यात्रियों से गर्रा पुल के पास लूट हुई थी। इसके एक दिन बाद ही 14 जुलाई को जनता एक्स्त्रपेस में भी महिला यात्रियों से लूट की घटना हुई थी। लगातार लूट की दो घटनाओं से खलबली मच गई थी। उस समय एसपी रेलवे सौमित्र यादव ने खुद डेरा डाला था। उन्होंने बताया था कि 75 फीसद ट्रेनों में एस्कॉर्ट नहीं है।

Posted By: Jagran