शाहजहांपुर : सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भी पालिका प्रशासन डेयरियों को बाहर नहीं कर पाया है। जिस कारण शहर के लोग जाम व गंदगी से रोजाना दो-चार होना पड़ रहा है। शहर में करीब सवा दो सौ डेयरियां चल रही है। इन डेयरियों के संचालक गोबर बाहर फेंकने की बजाय नालियों में बहा देते है, जिससे नालियां चोक हो जाती हैं। डेयरी के बाहर मार्गों पर गोबर के ढेर लगे रहते है। दुर्गंध के कारण आसपास के लोगों लोगों का जीना मुहाल है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल आदेश दिए थे कि शहर के अंदर चलने वाली डेयरियों को बाहर किया जाए। लेकिन इसके बावजूद भी डेयरी शहर के बाहर नहीं हुई। शहर से बाहर नहीं मिल रही भूमि : डेयरियों संचालकों ने बताया कि शहर के बाहर भूमि नहीं मिल पा रही है। जहां पर भूमि है, वो काफी महंगी है। पालिका प्रशासन को उन्हें शहर के बाहर कम दाम पर डेयरी के लिए भूमि मिलनी चाहिए। नगर पालिका परिषद ईओ ने बताया कि एसके ¨सह ने बताया कि डेयरियों संचालकों को शहर से बाहर करने के लिए नोटिस दिए गए है। उन लोगों से कहा है कि डेयरियों को शहर से बाहर ले जाएं। डेयरियों संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

अरुण कुमार का कहना है कि डेयरी होने से गंदगी के साथ-साथ मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। अन्य शहरों में डेयरियां शहर के बाहर है। इसलिए डेयरी शहर से बाहर होनी चाहिए।

हरित गुप्ता का कहना है कि डेयरी संचालकों को गोबर नाले-नालियों में नहीं बहाना चाहिए। जिससे नाले-नालियां चोक हो जाती है। जिससे सफाई व्यवस्था में दिक्कत होती है। शहर के बाहर खेतों पर गोबर डालना चाहिए।

अंकुश जुनेजा का कहना है कि शहर के अंदर डेयरी होने से नदी पर जानवर ले जाते समय सड़कों पर जाम लग जाता है। शहर के बाहर डेयरी होने से सड़कों पर जाम नहीं लगेगा।

रवि वर्मा का कहना है कि शहर में डेयरियों की संख्या कम होने के वजाय दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। नदी पर भैंसों ले जाने तथा वापस लाने का समय निश्चित होना चाहिए।

Posted By: Jagran

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