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ठगी की रकम बचाने को विक्रांत और सत्यप्रकाश ने खरीदी पांच करोड़ की जमीनें, पत्नी को साझीदार बनाया और बैंक से भी लिया लोन

Published: Wed, 19 Aug 2026 10:02 PM (GMT+05:30)

30 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी के गिरोह के साथी विक्रांत प्रकाश सिंह और सत्यप्रकाश यादव की 5 करोड़ ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।

HighLights

  1. विक्रांत प्रकाश सिंह की 4 करोड़ की संपत्ति जब्तीकरण।

  2. ठगी के 30 करोड़ रुपये से अधिक के मामले में कार्रवाई।

  3. गोरखपुर, लखनऊ में खरीदी गई संपत्तियों की जांच।

एसके सिंह, संतकबीर नगर। शेयर बाजार में शर्तिया मुनाफे का लालच दिखाकर निवेशकों से 30 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी करने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड धनंजय शुक्ला और उसकी पार्टनर रजनी प्रजापति के साथी विक्रांत प्रकाश सिंह और सत्यप्रकाश यादव भी शातिर खिलाड़ी निकले। दोनों ने गोरखपुर, संतकबीरनगर और लखनऊ जैसे शहरों में पांच करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्तियां खरीदीं हैं।

ठगी की रकम से बनाई गई संपत्ति को बचाने के लिए भी इन दोनों ने अलग-अलग तरीके अपनाए। एक ने संपत्ति में पत्नी को साझीदार बनाया तो दूसरे ने जमीन की खरीद में बैंक लोन का सहारा लिया। रजनी के बाद विवेचना में अपराध से अर्जित विक्रांत प्रकाश सिंह की चार करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्तियां के जब्तीकरण की कानूनी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

जांच में विक्रांत के छह बैंक खातों की जानकारी पुलिस के हाथ लगी है। इनमें एक्सिस बैंक, एचडीएफसी बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा और पंजाब नेशनल बैंक के चार खातों से गोरखपुर और लखनऊ की संपत्तियों की खरीद के साक्ष्य भी मिले हैं। यही कड़ी पुलिस की जांच को और महत्वपूर्ण बना रही है।

गोरखपुर से लखनऊ तक फैला संपत्ति का जाल

सहजनवां में कंप्यूटर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट चलाने वाले विक्रांत प्रकाश सिंह ने महज दो वर्षों के भीतर गोरखपुर और लखनऊ में करोड़ों रुपये की संपत्तियां खरीदीं। पुलिस के अनुसार, उसकी खरीदी गई अधिकतर जमीनों में पत्नी अनीता का भी नाम दर्ज है।

सहजनवां में फोरलेन किनारे, खजनी कस्बे और लखनऊ के चिनहट क्षेत्र में स्थित संपत्तियां को चिह्नित कर पुलिस ने बीएनएस की धारा 107 के तहत जब्तीकरण के लिए जुलाई में ही न्यायालय में रिपोर्ट दाखिल कर दी है।

मामले में 23 जुलाई को सुनवाई के दौरान जिला जेल में निरुद्ध विक्रांत को अदालत में पेश किया गया। उसके अधिवक्ता ने भूमि जब्तीकरण के संबंध में जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। इसके बाद 27 जुलाई को सुनवाई हुई। पांच, सात और 17 अगस्त को भी इस मामले में सुनवाई हो चुकी है। अब 20 अगस्त को बहस की तारीख निर्धारित है।

सत्यप्रकाश की विधियानी में मिली दाे संपत्ति, एक पर बैंक लोन

सत्यप्रकाश यादव की संपत्तियों की जांच में भी पुलिस को अहम जानकारी मिली है। अब तक करीब एक करोड़ की उसकी दो जमीनों का पता चला है। एक संपत्ति पर बैंक ऋण होने की जानकारी सामने आई है।

दोनों खलीलाबाद शहर के विधियानी मोहल्ले में वर्ष 2024 और 2025 में खरीदी गई थीं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन जमीनों की खरीद के लिए इस्तेमाल धन कहां से आया।

पूछताछ ने खोली थी सहयोगियों की परत

मास्टरमाइंड धनंजय शुक्ला और उसकी पार्टनर रजनी प्रजापति की गिरफ्तारी के बाद हुई पूछताछ और विवेचना में विक्रांत प्रकाश सिंह, चंद्रहर निवासी सत्यप्रकाश यादव समेत चार सहयोगियों के नाम सामने आए थे।

पुलिस विक्रांत और सत्यप्रकाश को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। दो अन्य आरोपित अभी फरार हैं। इनमें एक बस्ती और दूसरा संतकबीर नगर का निवासी बताया जा रहा है।

18 अक्टूबर 2025 को सामने आया था 30 करोड़ की ठगी का खेल

बहुचर्चित ठगी का मामला 18 अक्टूबर 2025 को तब सामने आया, जब हटवा निवासी संतराम मौर्य ने महुली थाने में 51 लाख रुपये की ठगी का मुकदमा दर्ज कराया। मुख्य आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद जांच आगे बढ़ी तो डिजिटल ठगी के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।

विवेचक उपनिरीक्षक ललितकांत के अनुसार, धनंजय शुक्ला ने रजनी प्रजापति के साथ मिलकर टीवीएस साल्यूशन डाट इन और एआइपीएल एप के जरिए डिजिटल नेटवर्क तैयार किया था। निवेशकों को शेयर बाजार में शर्तिया और वर्चुअल मुनाफे का लालच दिया जाता था और इसी झांसे में रकम निवेश कराई जाती थी।