संतकबीर नगर : नवरात्र के साथ ही बाजार में कोरोना को लेकर छाई वीरानगी पहली बार दूर हुई। नवरात्र के आठ दिनों में बाजार गुलजार रहे। हर दिन बाजार में भीड़ रही। लोगों ने आभूषण, कपड़े, गाड़ियों आदि की खरीद की। पर्व पर जनपद में लगभग 20 करोड़ का व्यापार हुआ।

नवरात्र के शुभ समय में सोने-चांदी के दाम भी स्थिर रहे। इससे सर्राफा की दुकानों पर लोग उमड़े। इलेक्ट्रानिक उपकरणों, मोबाइल, कपड़ों की दुकान, बर्तन, दो पहिया वाहनों समेत सभी दुकानों पर झूम कर लोगों ने खरीदारी की। इससे व्यापारियों में फिर से बाजार के पटरी पर आने की उम्मीद भी जगी है। शहर समेत ग्रामीण क्षेत्रों में यही हाल रहा।

विवेक छापड़िया ने बताया कि

कोरोना के दौर में व्यापार बुरी तरह से चौपट हुआ। सुखद है मां दुर्गा की पूजा के पवित्र पर्व पर मंदी दूर होने का संकेत मिला। दो वर्ष में पहली बार उनके संकट मोचन रिटेल शाप पर 15 से 16 लाख के कपड़ों की बिक्री हुई। बैजनाथ गुप्ताजयश्री प्रसाद जगन्नाथ प्रसाद की दुकान पर इस बार पहले की तरह ही ग्राहक उमड़े। टीकाकरण की प्रगति से कोरोना की रफ्तार थमने लगा है। जल्द ही कारोबार फिर से अपने पुराने रूप में आने की उम्मीद है। उनकी दुकान से इस बार त्योहार पर 20 से 25 लाख का कारोबार हुआ है। मन में पिछले दो वर्षों की निराशा का भाव तो रहा परंतु इस बार ग्राहक मोटरसाइकिल की खरीद के लिए ठीक-ठाक संख्या में आए। इससे कारोबार को संजीवनी मिली है, जागरण रिटेल शाप के साथ जुड़ने का भी लाभ मिला है। इस बार 80 से एक करोड़ तक का कारोबार हुआ है।

गगनदीप सिंह शैंकी भारत आटो सेल्स पर आठ दिनों में कारोबार उत्साहजनक रहा। पहली बार बाइक खरीद के लिए लोगों में उत्साह सामने आया। जागरण शापिग उत्सव के सहयोगी बनने का भी उन्हें लाभ मिला है। संस्था ने लगभग तीन करोड़ का कारोबार नवरात्र पर्व पर किया।

हरीश मिश्र जल्द ही बाजार अपने पुराने हालत पर आ जाएगा। नवरात्र के पर्व पर इसके संकेत मिल गए हैं। उनकी फर्म से पर्व पर लगभग एक करोड़ का व्यापार हुआ है। जैसे-जैसे कोरोना थम रहा है वैसे ही बाजार को बल मिलने लगा है।

मनीष रुंगटा अभी तक दुकान पर बैठकर ग्राहकों का इंतजार करना पड़ता था। शादी-ब्याह के लिए बहुत जरूरी होने पर लोग आभूषणों की खरीद के लिए आते थे। दो वर्ष बाद पहली बार खुलकर लोग अपने मन से बिना दबाव के आए। उनकी दुकान से लगभग 30 से 35 लाख का कारोबार हुआ।

रामकुमार वर्मा राधेगोविद पर इस बार मां दुर्गा की कृपा रही। पहले की तरह तो नहीं परंतु इसकी तुलना में संतोषजनक कारोबार हुआ। खास बात रही कि ग्राहकों को संतुष्ट करने का मौका मिला। दुकान के परंपरागत ग्राहकों से मिलने का अवसर मिलने के साथ ही कारोबार भी बढ़ा।

वैभव छापड़िया

Edited By: Jagran