देश को आजाद कराने के लिए हमारे महापुरुषों ने कुर्बानियां दी हैं। स्वाधीनता संग्राम के दौरान देश को अनेक महान नेता मिले जो देश-दुनिया में विख्यात हुए। स्वतंत्रता सेनानियों ने आजादी के आदर्शों के लिए सुख-सुविधाएं, लोभ-लालसा, धन संपत्ति त्याग करने की भावना लाखों लोगों तक पहुंचाई। हजारों लोगों ने स्वतंत्रता के लिए प्राण दे दिए। लाखों लोग जेलों में गए। आजादी मिलने के साढ़े सात दशक बाद भी प्रत्येक भारतीय एक स्वाधीनता सेनानी की तरह ही देश के लिए योगदान दे सकता है। हमें स्वाधीनता को नए आयाम देने हैं। ऐसे प्रयास करते रहना है जिनसे हमारे देश और देशवासियों को विकास के नए-नए अवसर प्राप्त हो सकें। हमारे किसान देश के लिए अन्न पैदा करते हैं। खाद्य सुरक्षा और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराके हमें शक्ति प्रदान करते हैं।

हमारे सैनिक सरहदों पर, बर्फीले पहाड़ों और चिलचिलाती धूप में हर जगह पूरी बहादुरी और चौकसी के साथ देश की सुरक्षा में समर्पित हैं। वे बाहरी खतरों से सुरक्षा करके हमारी स्वाधीनता सुनिश्चित करते हैं। जब हम उनके लिए सम्मान प्रकट करते हैं और उनके लिए अत्याधुनिक हथियार, स्वदेश में ही रक्षा उपकरणों के लिए सप्लाई-चेन विकसित करते हैं और सैनिकों को कल्याणकारी सुविधाएं प्रदान करते हैं, तब हम स्वतंत्र भारत की नींव को मजबूत करते हैं।

स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों में महिलाओं को सम्मान और बराबरी का हक भी है। महिलाओं की आजादी को व्यापक बनाने में ही देश की आजादी की सार्थकता है। यह सार्थकता घरों में माताओं, बहनों और बेटियों के रूप में तथा घर से बाहर अपने निर्णयों के अनुसार जीवन जीने की उनकी स्वतंत्रता में देखी जा सकती है। उन्हें अपने ढंग से जीने का तथा क्षमताओं का पूरा उपयोग करने का सुरक्षित वातावरण तथा अवसर मिलना ही चाहिए। एक राष्ट्र और समाज के रूप में हमें यह सुनिश्चित करना है कि महिलाओं को जीवन में आगे बढ़ने के सभी अधिकार और क्षमताएं सुलभ हों।

हमारे नौजवान भारत की आशाओं और आकांक्षाओं की बुनियाद हैं। हमारे स्वाधीनता संग्राम में युवाओं और वरिष्ठ-जनों सभी की सक्रिय भागीदारी थी लेकिन इस संग्राम में जोश भरने का काम विशेष रूप से युवा वर्ग ने किया था। आज जब हम युवाओं का कौशल-विकास करते हैं, उन्हें टेक्नालाजी, इंजीनियरिग और उद्यमिता के लिए कला व शिल्प के लिए प्रेरित करते हैं। उन्हें संगीत का सृजन करने से लेकर खेल प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करते हैं तब हम स्वाधीनता सेनानियों के सपनों का भारत बनाते हैं।

अजय कुमार भारद्वाज, प्रधानाचार्य।

ब्लूमिग ब्ड्स एकेडमी, खलीलाबाद।

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